203
प्रविष्टि 86
(संशोधन संख्या 54 पेश नहीं किया गया।) माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मेरा प्रस्ताव है :
“कि सूची I की प्रविष्टि 86 में ’गैरस्वापिक औषधियाँ’ शब्द लुप्त कर दिए जाएं।“
प्रस्तावित सूची ’गैरस्वापिक औषधियों’ को समवर्ती सूची में रखती है।
** माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, यह बिल्कुल सही है कि वर्तमान में यह प्रविष्टि प्रादेशिक सूची में है। लेकिन, दो तथ्य ऐसे हैं जिन्हें मानना होगा। पहला है कि किसी प्रदेश ने अब तक किसी समय इन इकाइयों पर कोई कर नहीं लगाया। दूसरे जब विषय समवर्ती होता है और केंद्र द्वारा कोई विधान बनाया जाता है, जिसकी आकृति राजस्व की होती है तो राजस्व अनुच्छेद 253 के खण्ड 2 के उपबंध के अधीन बांटने योग्य होगा। परिणामस्वरूप, जहाँ तक वित्त का प्रश्न है, राज्यों को किसी प्रकार की भी कोई हानि नहीं है। तब यह आवश्यक है कि संपूर्ण क्षेत्र में लागू अखिल भारतीय ड्रग्स एक्ट हमारे पास होना चाहिए। जब तक गैरस्वापिक औषधियाँ समवर्ती सूची में नहीं रख दी जातीं यह नहीं हो सकता।
यह प्रांतों को ऐसे स्थानीय विधान बनाने की शक्ति को भी बचाती है, जैसे वे इन औषधियों के बारे में पसंद करें।
माननीय सभापति : मैं डॉ. अम्बेडकर द्वारा लाए गए संशोधन को रखता हूँ। प्रश्न है :
(संशोधन स्वीकार किया गया। प्रविष्टि 86 संशोधित रूप में संघ सूची में जोड़ी गई।)
प्रविष्टि 86क
*** श्री एच वी कामथ : मैं नहीं जानता क्या मेरे संशोधन में चिकित्सा और वैज्ञानिक संबंधी परिभाषा गलत समझी गई है। यह परिभाषा औषधि बनाने की मानक पुस्तक में मिलेगी।
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 1 सितम्बर, 1949, पृ. 837
** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 1 सितम्बर, 1949, पृ. 839
*** सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 1 सितम्बर, 1949, पृ. 840