204 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : हमें शक्ति प्राप्त है। यह प्रविष्टि 20 में आती है जिसे हम समवर्ती सूची में रखने जा रहे हैं।
(श्री एच वी कामथ का संशोधन अस्वीकार किया गया। )
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प्रविष्टि 88क
* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मुझे आशा है कि मेरे मित्र संयुक्त राज्यों के उच्चतम न्यायालय के 4 पृष्ठ के फैसले को पढ़ने नहीं जा रहे हैं। यह प्रत्येक व्यक्ति को परिचालित किया गया था।
श्री देशबंधु गुप्त : मेरे मित्र के लिए यह मानना गलत होगा कि पूरा फैसला पढ़ा जाएगा। वास्तव में, यदि कुछ सारांश पढ़ना आवश्यक है तो मैं ऐसा करूंगा। मैं उन भागों को निर्दिष्ट कर रहा हूँ जो मेरे द्वारा उठाए गए बिंदुओं के अनुरूप हैं। मैं इशारा करना चाहता हूँ कि उन प्रकाशकों द्वारा इस आधार पर आपत्ति की गई थी कि संघीय संविधान को दो विशेष स्थानों पर नहीं माना गया था :
(1) कि चौदहवें संशोधन की धारा प् के खंड में दिए ढंग के विरुद्ध यह प्रेस
की स्वतंत्रता को कम करता है;
(2) उस संशोधन के विरुद्ध यह अभियुक्त को समान संरक्षण नहीं देता/
मना करता है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं भी व्यवस्था के प्रश्न पर खड़ा हो रहा हूँ।
श्री नजीरुद्दीन अहमद : एक ही समय पर दो व्यवस्था के प्रश्न नहीं हो सकते।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मेरा व्यवस्था का प्रश्न प्रारंभिक है। क्या मेरे मित्र ने जो संशोधन पर हस्ताक्षर करने वालों में हैं- उनका नाम यहाँ श्री सीताराम जाजू के पश्चात् है,- पहले ही अपने संशोधन की सूचना दे दी है क्या वह अब कह सकते हैं कि यह क्रम से नहीं है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यदि उन्होंने अपने संशोधन को संशोधित करने का प्रस्ताव किया होता तो वह क्रम में होता।
श्री देशबंधु गुप्त : मुझे अपनी राय बदलने का पूरा अधिकार है जैसा कि मेरे मित्र ने प्रायः किया है।
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 1 सितम्बर, 1949, पृ. 841