प्रविष्टि 88 क - Page 226

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माननीय सभापति : यदि उन्होंने हस्ताक्षर कर दिए हैं तो भी, मैं नहीं जानता कि उन्होंने 88क के लिए हस्ताक्षर किए हैं।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : उनका नाम श्री देशबंधु गुप्ता है।

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* माननीय सभापति : मैं सदस्यों को मुख्य प्रश्न पर सुनना पसंद करूंगा। लेकिन ऐसा करने से पहले, मैं जानना चाहूँगा कि क्या प्रारूपण समिति इस मद पर दुबारा विचार करना चाहेगी?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : इस सदन में व्यक्त बहुत-सी विचार धाराओं

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को हम सुनना चाहेंगे और तब यदि सदन अथवा आप, श्रीमन, देखें कि अभी किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचना संभव नहीं है तो मामला प्रारूपण समिति को सौंप दिया जाए। इसलिए, प्रारूपण समिति बहुत-सी विचारधाराओं के व्याख्यानों पर विचार कर सदन को स्वीकार्य कोई सिद्धांत ढूँढ सके। लेकिन, मैं नहीं समझता कि इसे दुबारा लिखने का यत्न करने का कोई उपयोग है। हमारे पास यहाँ बहुत ही निश्चित संशोधन हैं। एक यह मेरे मित्र का है, दूसरा मेरे मित्र झुंझुनूवाला का है- बिल्कुल निश्चित संशोधन।

माननीय सभापति : वास्तव में दो दष्ष्टिकोण हैं जिन पर विचार किया जाना है। एक क्या पूर्व अनुच्छेद की दृष्टि से, जिसे हम पहले ही पारित कर चुके हैं, वह संशोधन ठीक-ठाक है जो श्री गोयनका द्वारा पेश किया जाना प्रस्तावित है और दूसरा है......

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मुझे ऐसा कहने की इजाजत हो तो

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यह विषय इस आधार पर तय नहीं हो सकता कि क्या कोई बात शक्ति के बाहर होगी अथवा क्या कोई बात शक्ति के बाहर नहीं होगी। उसको तय करने के लिए यह सदन सक्षम नहीं है। यह एक न्यायिक विषय है। सदन को यह निश्चित करना चाहिए कि क्या हम अखबारों को बहुत से प्रविष्टियों से संरक्षण देना चाहते हैं जो या तो सूची I, सूची II अथवा सूची III में सम्मिलित हैं और यदि इन प्रविष्टियों से कोई छूट देना चाहते हैं तो किस हद तक, इसके बारे में हमें आश्वासन देना चाहिए। हम यहाँ किसी अखबार वाले व्यक्ति को किसी प्रकार का आश्वासन नहीं देना चाहते कि हमने एक मामला है जो फूलप्रूफ व नेव प्रूफ है। हम यह आश्वासन नहीं दे सकते। इस प्रकार अच्छा होता यदि हम इस विशिष्ट प्रश्न का विनिश्चय करते कि क्या हम अखबारों को बहुत-सी प्रविष्टियों के प्रवर्तन से संरक्षण देना चाहते हैं। यह मुख्य प्रश्न है।

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 1 सितम्बर, 1949, पृ. 843-44