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जिसे मैं निवेदन करना चाहता हूँ यह है कि इस तथ्य के होते हुए भी कि संवैधानिक गारंटियाँ जो संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान में दी गई। अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने यह अभिनिर्धारित किया है कि संविधान द्वारा गारंटी किए गए मूल अधिकार पूर्ण नहीं है और संयुक्त राज्य अमेरिका की कांग्रेस को संविधान में प्रयोग की गई भाषा के होते हुए भी; उन मूल अधिकारों पर उचित पाबंदियाँ लगाने का अधिकार है। वास्तव में मैं सदन को याद कराना चाहूँगा कि मैंने अपने आरंभिक भाषण में जो मैंने प्रस्ताव के समर्थन में दिया था कि इस सदन को प्रारूप, संविधान पर विचार करना चाहिए, मैंने मामले पर विचार करने के लिए जो समुचित भाग दिया, क्योंकि जिसपर अखबारों तथा दूसरों के द्वारा आलोचना सुनी थी जिसपर किसी हद तक ध्यान व इज्जत देने के लिए मैं बाध्य हूँ कि हमारे मूल अधिकार बिल्कुल मूल्य रहित हैं क्योंकि वे बहुत-सी परिसीमाओं के अधीन थे जो प्रस्ताव में गिनाई गई थी जो अनुच्छेद 13 के बाद में आने वाली प्रतिपादनों में अर्थात् खण्ड (2), (3), (4) और (5) में प्रगणित हैं।
इन आलोचनाओं का उत्तर देने की खातिर इस मामले पर उच्चतम न्यायालय के फैसलों की जांच करने का कष्ट उठाया। मैंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि एक समय मैंने महसूस किया था कि संवैधानिक गारंटी जिन्हें मूल अधिकार कहा जाता है संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान में पूर्ण शब्दों में बिना किसी पाबंदी के प्रतिपादित किए गए थे। संयुक्त राज्य अमेरिका के उच्चतम न्यायालय को उन उपबंधों को सीमित करने की स्वतंत्रता नहीं होनी चाहिए। लेकिन मुझे यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि संयुक्त राज्य अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने वही स्थिति अपनाई जिसे हमने संविधान बनाने में अपनाया है जैसे यह कि मूल अधिकार चाहें कितने भी मूल हों वे पूर्ण अधिकार नहीं हो सकते। वे किन्हीं परिसीमाओं के अधीन अवश्य होने चाहिए।
अब यदि सदन मुझे आज्ञा देगा तो मैं अपने भाषण में से केवल एक अंश उद्धृत करूंगा। जो मैंने कहा था वह इस प्रकार है, ’गिटलो बनाम न्यूयार्क’ में जिसमें विचारणीय विषय संवैधानिक तौर पर न्यूयार्क का ’आपराधिक अशासन’ कानून था। जिसका अभिप्राय क्रांतिकारी बदलाव लाने के बारे में विचारणीय निर्णय थे, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा थाः’
’यह मूलभूत सिद्धांत बहुत पहले से स्थापित है कि बोलने व प्रेस की स्वतंत्रता, जो संविधान के द्वारा संरक्षित है बोलने अथवा प्रकाशित करने के लिए पूर्ण अधिकार बिना इस जिम्मेवारी के है कि एक व्यक्ति क्या चुनता है; अथवा असीम और अमर्यादित लाइसेंस जो हर प्रकार की भाषा जानने के लिए हर संभव प्रयोग की आजादी देता है और उनको दण्ड से मुक्त करता है/बचाता है जो स्वतंत्रता को कोसते हैं/ बुरा कहते हैं।’