208 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
और मैंने दूसरे बहुत से मामलों का हवाला दिया। मेरा संपूर्ण मुद्दा है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में भी, यह एक मान्य सिद्धांत है कि मूल अधिकारों पर कुछ पाबंदियां होनी चाहिएं। मेरे फैसले से उन पर कोई प्रश्न नहीं किया जा सकता। इसलिए, जहाँ तक हमारी प्रविष्टि... मैं एक क्षण के लिए भी संशोधन करने नहीं जा रहा हूँ - विज्ञापनों पर करों के बारे में है, मेरा निवेदन है कि उस प्रविष्टि पर कोई प्रश्न न किया जाए जो प्रविष्टि इस सदन की कुछ करने की शक्ति से बाहर है क्योंकि यह प्रेस की स्वतंत्रता पर कुछ पाबंदियाँ लगाने जा रही है, यदि प्रादेशिक सरकारों ने इसके अनुसार कार्रवाई की। मैं उस भाषांतर को स्वीकार करने से बिल्कुल मना करता हूँ कि ’विज्ञापन’ शीर्षक के अंतर्गत लगाया गया कोई कर किसी की शक्ति के बाहर होगा क्योंकि वह अनुच्छेद 13 का उल्लंघन करेगी।
जो प्रतिपादन मैं निवेदन करता हूँ वह घोषित की जा सकती थी और जो सत्यभाषक है और जो स्वीकार की जानी चाहिए वह यह है कि किसी कठोर प्रकार के कर का अखबार पर लगाना जिसका परिणाम इसे पूर्णतः छुड़ा देगी। दूर कर देगा, जैसे कर लगाने की शक्ति का प्रयोग किसी की शक्ति के बाहर होगा क्योंकि यह बोलने की स्वतंत्रता को पूर्णतः रोक देगी जो अनुच्छेद 13 द्वारा गारंटीकृत है। जहाँ तक विज्ञापनों पर करों का लगाना उचित प्रकृति का नहीं है और भेदभाव पूर्ण है, यह कहना चाहिए कि यह केवल अखबारों तक सीमित है और दूसरे प्रकार के विज्ञापनों को छूट है, तब मैं समझ सकता हूँ कि वह अनुच्छेद 15 का विरोध करेगा जिसके अधीन हम सबको समान संरक्षण देने का प्रस्ताव करते हैं। इसलिए, मेरा निवेदन है कि जिस तर्क के अनुसार, कोई चीज जो अखबारों को और बोलने की स्वतंत्रता अथवा अखबारों में लिखने को प्रभावित करती है, किसी की शक्ति के बाहर होगी, मैं यह कहने की स्वतंत्रता चाहता हूँ; वह ऐसा तर्क नहीं है जिसे मैं स्वीकार करने को तैयार हूँ, मैं आशा करता हूँ कि यह सदन स्वीकार नहीं करेगा।
अब मैं दूसरे प्रश्न पर आता हूँ। यह बिल्कुल सही है कि कुछ हालात के कारण जो कुछ प्रदेशों में उभर कर आए हैं इस प्रविष्टि विशेष को अंतरित करना आवश्यक होगा जो सूची I से सूची II अथवा सूची III में रखने के बारे में है। यह संवैधानिक कानून का विषय नहीं है। यह नीति और आत्मविश्वास का विषय है जिसे आप केंद्र में अधिक विश्वास रखने के लिए तैयार हों अथवा क्या आप प्रदेशों में अधिक विश्वास रखने के लिए तैयार हों अथवा क्या आप प्रदेशों में विश्वास रखने के लिए तैयार हैं लेकिन क्या केंद्र के लिए कुछ स्वतंत्रता और शक्तियां आरक्षित करना और किसी गलती को ठीक करना पसंद करेंगे कि प्रांत को एक ऐसा विषय करना चाहिए जो वाद-विवाद के लिए खुला है। यह वही है जिस पर हम वाद-विवाद