प्रविष्टि 88 क - Page 231

210 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अब विचार करने के लिए प्रश्न है कि क्या प्रदेश इससे सहमत होंगे कि जिसे मैं महत्वपूर्ण भाग कहता हूँ जिसे मुझे कर लगाने का आधार कहना चाहिए जैसा समाचार पत्रों ने बनाया है प्रांतीय कर प्रणाली से सर्वथा हटा देना चाहिए। यह ऐसा विषय है जिस पर विचार होना चाहिए। श्रीमन, वित्तीय विषय होने के कारण मैं नहीं समझता कि प्रारूपण समिति बिना वित्त मंत्रालय अथवा प्रदेशों के वित्त मंत्रियों से विचार-विमर्श के अपने कंधों पर जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार होगी। जहाँ तक शुद्ध विधायी प्रविष्टियों से संबंधित विषय है, हम बहुत बड़ी जिम्मेवारी ले रहे हैं। जब वित्तीय प्रश्न का संबंध है, यहाँ स्थायी लोक सम्मति है हमें सदैव केंद्रीय वित्त मंत्रालय से परामर्श करना चाहिए तथा विभिन्न प्रदेशों के वित्त मंत्रियों से भी।

इसलिए ये कठिनाइयाँ हैं जो इन संशोधनों में हैं। अब मैं नहीं जानता, समाचार पत्रों की प्रविष्टि को आप संघ सूची को अंतरित करते हैं, केंद्र समाचार पत्रों पर उत्पादक की भांति कर लगाएगा क्योंकि भारत के किसी भाग में उत्पादित माल पर केंद्र को सीमा शुल्क लगाने का अधिकार है। मुझे यह प्रतीत होता है कि कर से बचना समाचारपत्रों के लिए कठिन होगा। इन सभी बातों पर विचार किया जाना चाहिएं। ये असंबद्ध विषय है जिसके लिए इस स्तर पर मैंने बयान दिया है क्योंकि मैं सोचता हूँ कि प्रत्येक सदस्य को जो बहस में भाग लेना चाहता है कठिनाइयाँ जाननी चाहिए। इन सब में मैं इस समय रुचि क्यों ले रहा हूँ इसका कारण यह है कि इस समय सदन के सामने किसी प्रकार की पाबंदियों पर विचार करने के लिए कोई रूकावट नहीं है तभी हमने अनुच्छेद 13 पारित कर दिया है। सदन के सामने उसकी स्वीकृति के लिए लाने के लिए, मेरे अनुसार मालुम की गई स्थिति बहुत खतरनाक है। यह पूर्णरूप से कर निर्धारण को छोड़ देगी। यदि आप कहते हैं कि क्योंकि मूल अधिकारों की गारंटी है इसलिए कर लगाने की शक्ति का भी प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए क्यों उसका परिणाम परिमितता होगा अथवा मूल अधिकारों की बर्बादी, यह प्रतिपादन बहुत बड़ा है और मैं नहीं सोचता कि कोई इसे कभी स्वीकार करेगा।

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पंडित ठाकुरदास भार्गव : मान लीजिए अधिकार पूर्णतः नष्ट नहीं होते, बल्कि उनमें कटौती होती है या हस्तक्षेप तो क्या इसमें वे नहीं आएंगे?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : उचित क्या है, न्यायालय इसका फैसला करेगा।

श्री अल्लादी कृष्णा स्वामी अय्यर : अपने भाषण में मैं कुछ भी जोड़ना नहीं चाहता।