212 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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* श्री नजीरुद्दीन अहमद : मैं संशोधन पेश नहीं करूँगा; लेकिन मैं प्रविष्टि पर बोलूँगा।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : गाने के साथ बच्चे को प्रस्तुत क्यों नहीं करते? केवल गाना ही क्यों? आप संशोधन पेश करें और भाषण भी दें।
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** माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : सभापति महोदय, मैं सरदार हुक्म सिंह द्वारा उठाये ऐतराज के बारे में कार्य करने का प्रस्ताव करता हूँ। मैं नहीं समझता कि उन्होंने प्रविश्टि 91 के उद्देश्य को समझा है इसलिए मैं बहुत स्पष्ट बता देना चाहूँगा कि सूची में प्रविष्टि 91 का उद्देश्य क्या है। इसलिए सूची I की सीमा अथवा क्षेत्र की परिभाषा करना वास्तविक है और मैं सोचता हूँ कि हम मामले से पहले ही निपट सके होते अर्थात् प्रविष्टि सूची II और III के साथ जोड़कर उसकी परिभाषा और क्षेत्र बताया होता जो इस प्रकार थी -
“सूची II अथवा III में शामिल की गई कोई चीज सूची I में समझी जायेगी“
वास्तव में इसका यहीं उद्देश्य है। यह दो भिन्न मार्गों में कार्य कर चुकी होगी या तो सूची I में प्रविष्टि 91 जोड़कर या एक प्रविष्टि रखकर जिसका सुझाव मैंने दिया था -
“कि सूची II अथवा III में सम्मिलित न की गई कोई चीज सूची I में आएगी।“
इसका यही उद्देश्य है। किन्तु ऐसी प्रविष्टि आवश्यक है और इसके विषय में यहाँ कोई प्रश्न नहीं हो सकता। अब मैं दूसरे विवाद पर आता हूँ जो यद्यपि
खुलासा नहीं है पर काना-फूसी करके बार-बार दुहराया गया है कि हमने सूची I में प्रविष्टि 91 क्यों रखी है, वास्तव में हमारे पास अनुच्छेद 223 है जो अवशिष्ट अनुच्छेद कहलाता है जो “समवर्ती सूची अथवा राज्य सूची में अंकित किसी विषय से संबंधित विषय पर केवल संसद को कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है।“ मैं प्रस्ताव को स्वीकार करता हूँ कि केन्द्र को दिये गये संविधान के स्पष्ट अनुच्छेद से जब कोई चीज सूची II अथवा सूची III सम्मिलित नहीं की गई है, तो यह अनावश्यक है कि सूची I में बशर्ते किसी किस्म को हम गिनें। ऐसा क्यों किया गया है उसका कारण यह है बहुत से राज्यों के मनुष्य खासतौर से भारतीय राज्यों के संविधान सभा
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 1 सितम्बर, 1949, पृ. 854
** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 1 सितम्बर, 1949, पृ. 856-57