प्रविष्टि 59 - Page 235

214 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सुनुंगा, अन्यथा मैं नहीं समझता कि इस बिंदु पर और चर्चा की आवश्यकता है।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : कोई बहस आवश्यक नहीं है। मैं कुछ भी कहने की इच्छा नहीं रखता। अथवा कुछ भी कहने की इच्छा नहीं है।

श्री बृजेश्वर प्रसाद : मैं अपना संशोधन वापिस लेना चाहूंगा।

(श्री बृजेश्वर प्रसाद के संशोधन को वापिस करने की आज्ञा नहीं दी गई। इसे मत के लिए रखा गया और अस्वीकार किया गया।)

सूची

* माननीय सभापति : क्या इस पर डॉ. अम्बेडकर कुछ कहना चाहते हैं?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : नहीं, श्रीमन, मैं उत्तर में कुछ भी कहना नहीं चाहता युवा और युवतियॉ अपनी चिन्ता करने में समर्थ हैं। (मैं) उनके लिए परेशान क्यों होऊं?

(संशोधन अस्वीकार किया गया। इसी प्रकार प्रो. एस. एल. सक्सैना का संशोधन भी अस्वीकार किया गया।)

प्रविष्टि 59

** श्री राज बहादुर : .....हमें समस्या की गंभीरता को समझना चाहिए। जैसा मैंने कहा, मैं कोई दूसरे संशोधन पेश नहीं करूंगा, क्योंकि मैं हतोत्साहित महसूस करता हूँ कि प्रारूपण समिति के आदरणाय अध्यक्ष अन्य सदस्यों द्वारा सुझाई गई नई प्रविष्टियों का उत्तर देने की परेशानी भी नहीं उठाना चाहते।

श्री टी. टी. कृष्णमाचारी : वह आपके द्वारा पेश किये गये संशोधन के अध्ययन में व्यस्त हैं।

श्री राज बहादुर : मैं भाग्यशाली हूंगा यदि मेरे प्रस्ताव का उत्तर मुझे मिल जाये।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मेरे मित्र मुझसे उत्तर की आशा रखते हैं। मैं केवल एक या दो शब्द कहूँगा।

भिक्षावृति के नियंत्रण और उन्मूलन के प्रश्न का विषय ऐसा है जो सूची III की प्रविष्टि 24 में पहले से ही उपबन्धित किया गया है जिसमें भिक्षावृति सम्मिलित है।

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 1 सितम्बर, 1949, पृ. 860-61

** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 1 सितम्बर, 1949, पृ. 883