प्रविष्टि 1 - Page 236

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मुद्दा केवल यह है कि उसे वही रहने दिया जाय अथवा यहाँ सूची I में लाया जाए। मैं समझता हूँ कि उसे सूची III में छोड़ देना अच्छा है जिससे उस प्रविष्टि का प्रयोग केन्द्र व प्रदेश दोनों कर सकें।

(श्री राजबहादुर का संशोधन वापिस हो गया।)

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* माननीय सभापति : डॉ. अम्बेडकर क्या आप कुछ कहना चाहते हैं?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं कुछ भी कहना नहीं चाहता।

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श्री बृजेश्वर प्रसाद : मैं अपना संशोधन वापिस लेता हूँ।

माननीय सभापति : सदन स्पष्ट रूप से इस संशोधन को वापिस करने की आज्ञा देने के पक्ष में नहीं है। मैं इसे मत के लिए रखूँगा। प्रश्न है-

“कि सूची II की प्रविष्टि 1 को नई प्रविष्टि 2 (क) के रूप में सूची I में स्थानांतरित कर दिया जाए।“

(संशोधन अस्वीकार किया गया।)

माननीय सभापति : संशोधन संख्या 63 डॉ. अम्बेडकर का संशोधन है।

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“कि सूची II कीप्रविष्टि I में निम्नलिखित को छोड़ दिया जाए -

’लोक व्यवस्था घोषणा से संबंधित कारणों के लिए, निवारक निरोध, ऐसे निरोध के अधीन व्यक्ति’“

यह प्रस्ताव किया जाता है कि इस प्रविष्टि को सूची III में रख दिया जाए। यही कारण है जिससे मैं इन शब्दों को छोड़ने का प्रस्ताव करता हॅँ।

सरदार हुक्म सिंह : श्रीमन, मेरा प्रस्ताव है :

“कि सूची II की प्रविष्टि 1 में “नौ सेना, सेना अथवा वायु सेना“ शब्दों के बाद“ अथवा संघ के कोई अन्य सशस्त्र शब्द रखे जाएं“

इस संशोधन को पेश करने का मेरा उद्देश्य है कि मैं महसूस करता हूँ कि प्रारूपण समिति की ओर से यह कमी है। यदि मुझसे यह कहा जाय कि यह साशय छोड़ा गया है...

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 1 सितम्बर, 1949, पृ. 865