216 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं इस संशोधन को स्वीकार करने के लिए तैयार हूॅ।
(संशोधन स्वीकार कर लिया गया। यथा संशोधित प्रविष्टि प् राज्य सूची में जोड़ी गई।)
प्रविष्टि 2
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मेरा प्रस्ताव है :
“कि सूची III, प्रविष्टि 2 के स्थान पर निम्नलिखित प्रविष्टि रखी जाय -
“2 उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय को छोड़कर न्याय प्रशासन, संविधान और सभी न्यायालयों के संगठन में ली जाने वाली फीस, उच्चतम न्यायालय को छोड़कर।’’
इसमें लाया गया बदलाव केवल यह है कि उसमें उच्च न्यायालय को लाया गया है क्योंकि जैसा मैंने कल कहा था जहाँ तक संविधान और उच्च न्यायालय का सम्बन्ध है कि वे पूर्णतः केन्द्र के नियंत्रण में हैं।
(प्रविष्टि 2 संशोधित रूप में राज्य सूची में जोड़ी गई।)
प्रविष्टि 4
** श्री वृजेश्वर प्रसाद : बिना कोई टिप्पणी किए मैं अपना संशोधन पेश करूँगा अर्थात् मैं कोई भाषण नहीं दूंगा। श्रीमन मेरा प्रस्ताव है :
“कि संशोधन की सूची के संशोधन संख्या 3589 के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाए :
“कि सूची II में प्रविष्टि 4 को सूची I से हटा दिया जाए और सूची I में सम्मिलित किया जाए“।
श्री मान, आप की आज्ञा से मैं यह कहना चाहूँगा कि सूची I के स्थान पर प्रविष्टि को सूची III में सम्मिलित किया जाए। इससे भी टी. टी. कृष्णमाचारी के एतराज का समाधान होगा। श्रीमान जी, मैं ’पुलिस’ को बहुत बड़ा विषय मानता हूँ और मैं
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 1 सितम्बर, 1949, पृ. 866
** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 1 सितम्बर, 1949, पृ. 868