प्रविष्टि 4 - Page 238

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सोचता हूँ कि इनको समवर्ती शक्तियों में सम्मिलित कर दिया जाए और इस प्रकार केन्द्र के अधीन लाया जाए।

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आप संतुष्ट हैं कि “पुलिस“ में होम गार्ड व प्रान्तीय रक्षा दल सम्मिलित हैं।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यह प्रान्त द्वारा बनाये कानून पर निर्भर करता है। यदि पुलिस कानून के अधीन ये कुछ व्यक्तियों को सूचीवद्ध करते हैं, उस उद्देश्य के लिए वह पुलिस होगी अथवा यदि वे किसी अन्य कानून के अधीन सम्मिलित करते हैं और उनको पुलिस की शक्तियाँ दी जाती हैं तो वह भी पुलिस होगी।

श्री महावीर त्यागी : क्या मुझे यह पूछने की इजाजत है कि होमगार्ड और प्रान्तीय रक्षा दल भारत सरकार की अवशिष्ट शक्तियों के अधीन आएंगे स्थानीय सरकार द्वारा नियंत्रित होंगे। कहाँ जायेंगे?

मननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यदि यह पुलिस नहीं है तब यह केन्द्रीय सरकार के अधीन जाएंगे।“ “पुलिस“ सेना से भिन्न प्रयुक्त होती है। जो कुछ भी “सेना“ नहीं है वह “पुलिस“ है।

श्री महावीर त्यागी : आपके जो नियम प्रश्नों में हैं, उन्हें नीचे जाने दें।

पंडित हृदयनाथ कुंजरू : यदि डॉ. अम्बेडकर का अर्थ लगाना सही है, तो राज्य बिना उसके नाम से पुकारे एक फौज खड़ी कर सकता है।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : नहीं, मैं नहीं सोचता कि वे ऐसा कर सकता है।

डॉ. पी. एस. देशमुख : यह वही है जो पहले से हो रहा है।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : एक सेना भारतीय सेना अधिनियम, 1911 के अधीन बनाई जाती है और उस अधिनियम में भर्ती करने की कठोर शर्तें रखी गई हैं। राज्य को उस प्रविष्टि पर कानून बनाने का बिल्कुल भी अधिकार नहीं है।

पंडित हृदयनाथ कुंजरू : एक प्रान्त एक सैना तैयार करने के बारे में कानून नहीं बनाये। लेकिन वह बल खड़ा कर सकता है और बिना इसको सेना नाम से बुलाये सेना का प्रशिक्षण दिला सकता है।

श्री टी. टी. कृष्णमाचारी : श्रीमन, मुझे जिक्र करना चाहिए कि प्रदेशों में सशस्त्र पुलिस है। उनकी भर्ती पुलिस अधिनियम द्वारा दी गई शक्तियों के अधीन की जाती है। यद्यपि वे अर्द्ध-सेना बल पर आधारित हैं, फिर भी उनको पुलिस बल कहा जाता है।