प्रविष्टि 14 - Page 241

220 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

प्रविष्टि 14

* माननीय सभापति : अब प्रश्न है कि क्या हमें एक अतिरिक्त प्रविष्टि जैसे “मकान और किराये के नियम और नियंत्रण“ की एक नई प्रविष्टि रखनी चाहिए श्री त्यागी आप इसे एक अलग प्रविष्टि के रूप में पेश किजिए।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : हाँ, उन्हें एक पृथक प्रविष्टि पेश करनी चाहिए।

श्री महावीर त्यागी : मैं अपने और डॉ. अम्बेडकर के प्रति आभारी हूँ। वह प्रथम बार मेरे प्रति दयालु हुए हैं।

श्रीमन, मेरा प्रस्ताव है : प्रारूपण समिति द्वारा पेश की गई सूची के लिए संशोधन पेश करना वास्तव में गौरव की बात है जिसके लिए प्रारूपण समिति सदैव साधन सम्पन्न रही है और उनसे सफलतापूर्वक झगड़ना कठिन है।

माननीय सभापति : किन्तु आप एक अतिरिक्त प्रविष्टि पेश कर रहे हैं।

श्री महावीर त्यागी : हाँ, श्रीमन, लेकिन प्रारूपण समिति की स्वीकृति प्राप्त करना शेष है। आखिरकार यह प्राथमिक बात है कि वे जो सुझाव स्वीकार करते हैं और यदि वे उनको स्वीकार करेंगे तो सदन आसानी से सहमत हो जायेगा।

सदन एक प्रविष्टि के लिए पहले से ही सहमत हो गया है जो कहती है कि सभी अवशिष्ट शक्तियाँ केन्द्र को दी जाएंगी वह सभी सूची II और III में नहीं रखी गई हैं। मैं निवेदन करता हूँ कि शहरी क्षेत्रों में मकानों का नियंत्रण और उन मकानों के किराये का नियंत्रण आज महत्वपूर्ण विषय है। भारत शासन अधिनियम, 1935 की असल सूची में यह नहीं था क्योंकि उस समय मकानों पर व किराये पर नियंत्रण आवश्यक नहीं था और भारत अधिनियम में मौजूद नहीं था लेकिन........

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : आदरणीय सदस्य के तर्कों को मैं समझता

vE csMdj

हूॅ और कुछ मिनटों में मैं उनको उत्तर दे सकता हूँ।

श्री महावीर त्यागी : हाँ, और इसीलिए मैं केवल निवेदन करता हूँ कि वहाँ मकानों का नियंत्रण और किराये का नियंत्रण विषय होना चाहिए मैं इससे भी आगे जाऊंगा और कहता हूँ कि इसमें अच्छे अनाज का नियंत्रण भी आना चाहिए। यदि सदन सहमत होता है तो इसे एक स्वतंत्र अनुच्छेद की भांति लाना चाहिए।

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 1 सितम्बर, 1949, पृ. 874