प्रविष्टि 14 - Page 242

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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमान, मैं समझता हूँ यहाँ तीन भिन्न प्रश्न

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हैं यद्यपि उस शक्ल में श्री त्यागी द्वारा नहीं रखे गये हैं। प्रथम प्रश्न है मकानों का नियंत्रण और किराये का नियंत्रण ठीक करने की शक्तियां राज्य विधानमंडल के पास होनी चाहिएं अथवा नहीं होनी चाहिएं। मैं इस विषय पर सोचता हूँ कि यहाँ विचारों की भिन्नता नहीं हो सकती कि प्रान्तीय सरकारों के पास इस प्रकार की शक्तियाँ होनी चाहिएं। तब प्रश्न है कि क्या मसौदा संविधान और सूची की प्रविष्टि ने प्रान्तीय विधानमण्डल के लिए मकानों का नियंत्रण और किराये का नियंत्रण ठीक करने के उद्देश्य की शक्तियों के लिए कोई उपबन्ध किया है अब मेरा निवेदन है कि श्री त्यागी द्वारा प्रस्तावित स्पष्ट प्रविष्टि अनावश्यक है, क्योंकि दो अन्य प्रविष्टियाँ हैं जैसे सूची II की प्रविष्टि 24 जो भूमि, भूमि में अथवा भूमि पर अधिकार, भूमि के मालिक तथा किसान के सम्बन्ध सहित भूमि की शर्तें अथवा समय और लगान की वसूली इत्यादि-इत्यादि“। यह एक प्रविष्टि है। कृषि भूमि को छोड़कर अन्य सम्पत्ति के अंतरण रजिस्ट्री व अन्य दस्तावेज करने के सम्बन्ध में सूची III की संख्या 8 की एक अन्य प्रविष्टि है। यह दो प्रविष्टियाँ प्रदेश सरकार को मकान व किराये के नियंत्रण से सम्बन्धित जानकारी कराने के लिए स्थापित की गई हैं - मेरे मित्र श्री त्यागी भी जानते हैं कि तथ्य फिर भी यह है कि ऐसी प्रविष्टि भारत शासन अधिनियम की सूची II में आज मौजूद नहीं है किसी भी राज्य ने इस विषय पर नियम नहीं बनाया है। इसलिए भूमि से संबंधित प्रविष्टि 24 और दूसरी प्रविष्टि संख्या 8 सम्पत्ति के अंतरण संबंधी शक्तियाँ जिन्हें श्री त्यागी देना चाहते हैं, देने में पूर्णतः सक्षम हैं।

श्री त्यागी अब इस प्रविष्टि को सम्मिलित करने में दूसरी कठिनाई यह है, मान लो हम अब इस प्रविष्टि को सम्मिलित करना चाहते हैं, यह किसी हद तक उन कानूनों पर शंका पैदा करेगी जिन्हें प्रदेशों ने मकान और किराया नियंत्रण के लिए पहले ही बना लिया है। ऐसा प्रतीत होता है कि विधानमण्डल ने स्वयं महसूस किया था कि प्रविष्टि जैसी यह पहले से मौजूद थी इस उद्देश्य के कानून बनाने के लिए मंत्रिमंडल को शक्तियां देने के लिए काफी नहीं थी। और इसीलिए यह आवश्यक था कि स्पष्टतः ये शक्तियां दी जाएं। मैं सोचता हूँ कि हम अनावश्यक रूप से पहले से पारित कानूनों की वैधता पर शंका व्यक्त कर रहे थे। अतः संशोधन स्वीकार करने के विरुद्ध यह अतिरिक्त आधार है। जैसा मैंने कहा, यह अनावश्यक है, क्योंकि ऐसे नियम बनाने के लिए प्रदेशों के पास समुचित शक्तियां हैं और दूसरे कानूनों की वैधता बनाने की है।

अब मैं तीसरे भाग पर आता हूँ। छावनी क्षेत्र में किराया और स्थान को ठीक रखने के विषयक प्रश्न पर जब हम चर्चा कर रहे थे तब श्री त्यागी किसी हद तक इसके लिए झगड़ रहे थे। यदि मेरे मित्र का इरादा यह है कि इस प्रविष्टि को