222 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
स्वीकार करके उन शक्तियों को नकार दिया जाए जो सूची I में प्रविष्टि के लिए दी गई थी, चूंकि यह पहले ही पारित कर दी गई थी तब मैं सोचता हूँ कि यह पूर्णतः गलती थी। ऐसा होते हुए भी तथ्य यह है कि यह प्रविष्टि संविधान का भाग बनेगी, जो प्रविष्टि पहले से ही पारित की जा चुकी है वह वैधानिक होगी, किसी शक्ति के प्रदेश में होते हुए भी छावनी अपने क्षेत्र के मकान और उनके क्षेत्र व उनके किराये के सम्बन्ध में कानून बना सकेगी।
इसलिए मैं अपने मित्र श्री त्यागी से अनुरोध करता हूँ कि उनके उद्देश्य की पूर्ति पहले से ही हो चुकी है और इस प्रविष्टि को रखना अनावश्यक हो गया है,
खासतौर से इसलिए कि इन प्रविष्टियों के अधीन पहले से ही पारित कानूनों पर यह शंका पैदा होगी।
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* श्री महावीर त्यागी : मान लो कि मालिक इस आधार पर ऐतराज करता है कि राज्य सरकार को किराया नियंत्रण का अधिकार नहीं है तो क्या होगा?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : नहीं, वह नहीं कर सकता क्योंकि साधारण
खंड अधिनियम में, भूमि में इमारतें भी सम्मिलित हैं।
श्री महावीर त्यागी : यह कानून का नया अर्थ है कि भूमि में इमारतें शामिल होती है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : वह नई है, क्योंकि कानून श्री त्यागी का व्यवसाय नहीं है।
प्रविष्टि 15
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमान, मेरा प्रस्ताव है
“कि सूची II की प्रविष्टि 15 में “जन्म और मष्त्यु रजिस्ट्रेशन“ शब्दों को निकाल दिया जाए।
यह समवर्ती सूची में अंतरित हो गये हैं।
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* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 1 सितम्बर, 1949, पृ. 874-875
** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 1 सितम्बर, 1949, पृ. 875