230 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
“कि सूची III की प्रविष्टि 2 के पश्चात् निम्नलिखित प्रविष्टि जोड़ दी जाए :
’2क. विधि द्वारा स्थापित सरकार के स्थायित्व और जनता में शांति बनाए रखने और समाज के जीवन के लिए अत्यावश्यक सेवाएं अथवा आपूर्ति, ऐसे निरोध के अधीन व्यक्ति के संबंधित कारणों के लिए निवारक निरोध’“।
सातवीं अनुसूची (जारी)
सूची
समवर्ती सूची
प्रविष्टि 2-क
* उपसभापति (श्री टी.टी. कृष्णमाचारी) : अब हम समवर्ती सूची की प्रविष्टि 2क पर विचार कर रहे हैं।
श्री नजीरुद्दीन अहमद (पश्चिम बंगाल : मुस्लिम) : श्रीमन, उपसभापति जी, मैं अपने संशोधन संख्या 290 में जुबानी बदलाव करने के लिए आपकी इजाजत चाहता हूँ। संख्या 289 श्री कामथ द्वारा पेश की गयी है। मैं दूसरी प्रविष्टि पेश करना चाहता हूँ और जुबानी बदलाव करने के लिए आपकी इजाजत चाहता हूँ। मैं जानता हूँ कि संशोधन कभी भी स्वीकार नहीं होगा। यहाँ तक कि इस पर विचार भी नहीं होगा। इसलिए संशोधन को देखने में अच्छा बनाने में कोई हानि नहीं है। क्या आपकी इजाजत से ’शक्ति से सरकार को पलट देना’ के स्थान पर अपने संशोधन में ’राज्य की सुरक्षा’ शब्द बदल सकता हूँ? ’राज्य की सुरक्षा’ शब्द अधिक उचित दिखाई देता है और बदलाव जुबानी है। उपसभापति : हाँ।
श्री नजीरुद्दीन अहमद : श्रीमन, मैं प्रस्ताव पेश करने की इजाजत चाहता हूँ।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (बम्बई : सामान्य) : श्रीमन, क्या मैं अपने मित्र को सलाह दे सकता हूँ कि क्या वे इन शब्दों को स्वीकार करने को तैयार हैं कि जो मैंने अब सुझाए हैं जैसे ’विधि द्वारा स्थापित सरकार के स्वामित्व से संबंधित’
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 2 सितम्बर, 1949, पृ. 929-930