प्रविष्टि 2-क - Page 252

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शब्दों के स्थान पर ’राज्य की सुरक्षा से संबंधित’। मैं स्वीकार करने के लिए तैयार हूँगा क्योंकि मैं पाता हूँ कि ठीक वही भाषा है जिसे सूची I की संशोधित प्रविष्टि 3 में प्रयुक्त किया गया था। हमने वहाँ ’भारत की सुरक्षा’ प्रयुक्त किया था। यदि उन शब्दों से मेरे मित्र संतुष्ट हैं जो मैंने अभी सुझाये हैं तो मैं इसे स्वीकार करने के लिए तैयार हूँगा। माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : आपके शब्द भिन्न हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : मैं डॉ. अम्बेडकर के प्रति अनुग्रहीत हूँ, किन्तु यह बदलाव मात्र है जिसे करने के लिए मैं उपसभापति से इजाजत चाह रहा था।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : तब यहाँ बोलने के लिए कुछ भी नहीं है। जैसा मैंने सुझाव दिया है मेरे आदरणीय मित्र संशोधन पेश करेंगे, मैं स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : मुझे अपना संशोधन पेश करना चाहिए।

उपसभापति : जैसे डॉ. अम्बेडकर इसे स्वीकार कर रहे हैं क्या आदरणीय सदस्य के लिए संशोधन पेश करना और उस पर बोलना आवश्यक है?

श्री नजीरुद्दीन अहमद : यदि मेरे मित्र पहचानने में असफल होते हैं कि मैं एक संशोधन पेश करने जा रहा था जो सही है और उनके विचारों के अनुरूप हैं तो मैं उसकी सहायता नहीं कर सकता, लेकिन मुझे मेरा संशोधन पेश करने दीजिए। श्रीमन, मैं पेश करने की इजाजत चाहता हूँः

“कि सूची I के संशोधन संख्या 124 (छठा सप्ताह) में, सूची III की प्रस्तावित नई प्रविष्टि 2क में ’सरकार की स्थिरता’ शब्दों के स्थान पर ’राज्य की सुरक्षा’ शब्द रखे जाएँ।’’

’सरकार की स्थिरता’ यह उचित नहीं है....“

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : चूंकि मैं संशोधन स्वीकार कर रहा हूँ। मैं नहीं समझता कि कोई तर्क आवश्यक है।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : मैं जानता हूँ किंतु यहाँ सदन है। मैं केवल एक-दो शब्द कहूँगा। ’सरकार की स्थिरता’ पद डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित नई प्रविष्टि के संदर्भ में अस्पष्ट है। जैसे ’सरकार की स्थिरता’ से संबंधित कारणों के लिए निवारक निरोध’। ’सरकार’ और ’राज्य’ भिन्न-भिन्न बातें हैं।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यही कारण है जिससे मैंने इसे स्वीकार किया है।