प्रविष्टि 2-क - Page 253

232 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री नजीरुद्दीन अहमद : लेकिन श्रीमन, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे इसे क्यों स्वीकार कर रहे हैं?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैंने कहा था ’राज्य की सुरक्षा’ उचित पद है। इसलिए तर्क की यहाँ कोई आवश्यकता नहीं है।

उपसभापति : आदरणीय सदस्य द्वारा प्रस्तावित संशोधन स्वीकार कर लिया गया है, यहाँ विस्तृत वाद-विद की आवश्यकता नहीं है।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : लेकिन सदन को जानना चाहिए कि खराब मसौदे को उजागर करने में इतनी उत्तेजना क्यों हो? यही मुद्दा है।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यदि मेरे द्वारा स्वीकार करने से मेरे आदरणीय सदस्य संतुष्ट हैं जो भी मैंने गलती की है, मैं इसे करना चाहता हूँ।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : केवल सदन द्वारा नहीं अपितु संसार द्वारा मेरी प्रशंसा की जानी चाहिए ’सरकार की स्थिरता’।

जैसा प्रारूपण किया गया है, का अर्थ है मंत्रालय की असुरक्षा जिसके लिए यह विरोधियों को कैद करा दे।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : बहुत अच्छा, हमने चतुराई से बुरा किया है। क्या यह काफी नहीं है?

* * * *

* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, जैसा कि सूचना के कागज पर है कि संशोधन संशोधित रूप में रखा जाना है अन्य नहीं।

उपसभापति : जैसा डॉ. अम्बेडकर ने पुनः निरीक्षित किया है मैं संशोधन संख्या 124 को अब रखता हूँ। प्रश्न हैः

“कि सूची III की प्रविष्टि 2 के पश्चात् निम्नलिखित प्रविष्टि रखी जाए :

’2क. ऐसे निरोध के अधीन व्यक्ति, राज्य की सुरक्षा और लोक व्यवस्था बनाए रखना और सेवाएं अथवा आपूर्ति जो मानव जीवन के लिए अति आवश्यक है से संबंधित कारण से निवारक निरोध।’“

(प्रस्ताव स्वीकार हुआ।)

(प्रविष्टि 2क संशोधित रूप में समवर्ती सूची में सम्मिलित की गई।)

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 2 सितम्बर, 1949, पृ. 931