प्रविष्टि 34 क - Page 265

244 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : संविधान के संशोधन द्वारा यह किया जा सकता है।

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* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मुझे बड़ा दुख है किंतु मैं श्रीमती पूर्णिमा बनर्जी द्वारा पेश किए गए संशोधन को स्वीकार नहीं कर सकता। शब्द ’शिक्षा’ की पुरःस्थापना मुझे बिल्कुल अनावश्यक प्रतीत होती है। ’सामाजिक’ शब्द कुछ भी सम्मिलित करने के लिए बहुत विस्तृत है जो वास्तव में धार्मिक आयोजना को छोड़कर संपूर्ण समाज से संबंधित है और विरोध मात्र ’सामाजिक’ और ’धार्मिक’ में होगा, इसके बाद प्रत्येक चीज राज्य के लिए खुली होगी।

मेरे माननीय मित्र रोहिनी कुमार चौधरी के विचारों के बारे में, मैं सोचता हूँ कि वह समझेंगे कि इस प्रविष्टि को समवर्ती सूची में स्थान मिला है और राज्य को अपने ढंग से योजना बनाने की पूर्ण स्वतंत्रता है। यह केवल उस समय है जब केंद्र एक योजना रखता है और यदि वह योजना राज्य द्वारा तैयार योजना के विरोध में आती है तो राज्य द्वारा तैयार योजना छूट जाएगी और यह राज्य की योजना शक्ति पर किसी प्रकार भी अतिक्रमण नहीं है और इसलिए यह प्रविष्टि, मैं निवेदन करता है; जिस भाषा में इस समय है, उसी में रहनी चाहिए।

उपसभापति : प्रश्न है :

“कि सूची III की प्रविष्टि 34 के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाए :

’34. आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक आयोजना’“

संशोधन अस्वीकार किया गया।

(प्रविष्टि 34 समवर्ती सूची में जोड़ी गई।)

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प्रविष्टि 34-क

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मेरा प्रस्ताव हैः

“कि सूची III की प्रविष्टि 34 के पश्चात् निम्नलिखित नई प्रविष्टि रखी जाएः

’34क. पुरातत्व महत्व के स्थान और खण्डहर’“

यह समवर्ती होगा।

(प्रविष्टि 34-क समतर्वी सूची में जोड़ी गयी।)

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 3 सितम्बर, 1949, पृ. 952

** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 3 सितम्बर, 1949, पृ. 9952