246 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय सभापति : अब कोई संशोधन नहीं है।
(प्रविष्टि 36 समवर्ती सूची में जोड़ी गई।)
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माननीय सभापति : यहाँ पंडित गोविन्दवल्लभ पंत द्वारा प्रस्तावित नई प्रविष्टि है।
(संशोधन संख्या 144 पेश नहीं किया गया था।)
* डॉ. पी.एस. देशमुख : श्रीमन, मेरा प्रस्ताव हैः
“कि सूची III में निम्नलिखित नई प्रविष्टि जोड़ी जाए :
’बच्चों और युवाओं की शोषण और परित्यजन से अनुच्छेद के ( VI ) द्वारा’“
श्रीमन, मैंने दो अवसरों पर ऐसे ही संशोधन पेश किए थे ...
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : इस संशोधन पर अन्य संशोधनों के साथ
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विचार हुआ था और अपने मित्र को बताते हुए उत्तर दिया था कि इस मामले पर मसौदा समिति द्वारा विचार होगा, तब वह सहमत होंगे।
डॉ. पी. एस. देशमुख : मेरा मात्र निवेदन है कि जैसा मसौदा समिति चाहे, शब्दों को बदल देना चाहिए कि जैसा मैंने प्रस्ताव किया है प्रविष्टि को तदर्थ तौर पर स्वीकार कर लेना चाहिए। इसे केवल मसौदा समिति द्वारा स्वीकार करने के लिए नहीं छोड़ना चाहिए। कोई शब्द जो उचित हो रखे जाने चाहिए लेकिन प्रविष्टि ऐसी होनी चाहिए जो बच्चों और युवाओं की शोषण और परित्यजन से संरक्षा करे। मुझे आशा है कि डॉ. अम्बेडकर कृपया इसे स्वीकार कर लेंगे।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैंने अपने मित्र से कहा था कि यदि मैं
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देखता हूँ कि जो प्रयोजन उनके मस्तिष्क में है, जो इसे प्रविष्टियों से पूरा नहीं होता है तो, ऐसी कोई प्रविष्टि दाखिल करने के लिए मैं प्रयत्न करूँगा। मैंने उन्हें ऐसा विश्वास दिलाया है।
डॉ. पी. एस. देशमुख : यह वह प्रश्न है जिससे मैंने और सदन के कम से कम कुछ सदस्यों ने समुचित महत्व दिया है..... मैं आशा करता हूँ श्रीमन, यदि मेरे द्वारा प्रस्तावित जैसी कोई प्रविष्टि ली गई तो कोई हानि नहीं होगी।
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 3 सितम्बर, 1949, पृ. 954