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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं इस विषय पर व्यक्तिगत ध्यान दूँगा। उद्देश्य से मेरी पूरी सहानुभूति है। मैं इससे क्या अधिक कर सकता हूँ?
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* श्री नजीरुद्दीन अहमद : एक वक्ता ने अभी-अभी कहा है कि वेश्यावृत्ति पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : क्या यह प्रश्न ऐसा है जिस पर बहस की जरूरत है? केवल प्रश्न यह है कि क्या राज्य के पास शक्तियाँ है अथवा केंद्र के पास अथवा यह समवर्ती हो। शक्तियों का प्रयोग किस प्रकार किया जाएगा क्या आंशिक आज्ञा दी जाएगी अथवा इसे पूर्णतः प्रतिबद्ध किया जाएगा यह विषय प्रत्येक विधान-मंडल का है जो हमें विधानमंडल पर छोड़ देना चाहिए।
श्री नजीरुद्दीन अहमद : मेरा निवेदन है कि यह सुसंगत है। संशोधन ’वेश्यावृत्ति के विनियमन और नियंत्रण’ के लिए उपबंध करता है....
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श्री वी. आई. मुनीस्वामी पिल्लई (मद्रास : सामान्य) : मैं बोलना चाहता हूँ,
श्रीमन।
माननीय सभापति : बहुमत से बहस बंद कर दी गई। प्रश्न हैः
“कि प्रश्न अब रखा जाए।“
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, उन मामलों को विनियमित करने के लिए इन प्रविष्टियों में राज्यों को काफी शक्तियां दी गई हैं जैसे या तो लोक सदनों के लिए अथवा बड़े पैमाने पर कृषि के लिए। यदि मेरे मित्र श्री देशमुख सूची II की प्रविष्टि 1 को देखें जो लोक व्यवस्था के बारे में और प्रविष्टि 4 जो पुलिस के बारे में है, तो वह देखेंगे कि इन विषयों को विनियमित करने के लिए आवश्यकता से अधिक शक्तियाँ दी गई हैं। यदि वह राज्य सूची की प्रविष्टि 24 जो भूमि के विषय में है प्रविष्टि 21 जो कृषि के विषय में है को देखें तो वह देखेंगे कि राज्य के पास राज्य कृषि फार्म बनाने के लिए अथवा जो चाहें पर्याप्त शक्तियाँ हैं।
इसलिए केवल प्रश्न शेष यह रहता है कि यह विषय जो कृषि फार्मों के बनाने अथवा सार्वजनिक भवनों को विनियमित करने के लिए है, समवर्ती सूची में रहने चाहिए। मेरे विचार से यह निश्चय करने की कसौटी कि यह विषय समवर्ती सूची
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 3 सितम्बर, 1949, पृ. 957-958