नई प्रविष्टि 88 क - Page 269

248 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

में होना चाहिए अथवा राज्य सूची में, क्या यह विषय अखिल भारत से संबंध रखता है अथवा शुद्ध रूप से स्थानीय है। मेरे विचार से वेश्यावृत्ति, सार्वजनिक भवनों का विनियमन और कृषि फार्मों का बनाना स्थानीय विषय हैं और इसलिए यह अच्छा है कि इन्हें राज्य के पास छोड़ दिया जाए। इनके लिए इनके पास आवश्यकता से अधिक शक्तियां हैं। मैं नहीं जानता कि केंद्र किस प्रकार कार्य करेगा। केंद्र के पास कृषि फार्म भूमि नहीं होती। यदि केंद्र कोई फार्म स्थापित करना चाहता है तो केंद्र किसानों से संपत्ति अर्जित करेगा। ऐसी ही बात राज्य द्वारा हो सकेगी। मैं नहीं देखता कि इन प्रविष्टियों को समवर्ती सूची में रखने से क्या प्रयोजन पूरा होगा? और यह भी याद रखना चाहिए कि हमारे राज्य जिन्हें हम राज्य कहते हैं, यूरोप के राज्यों से बहुत बड़े हैं।

श्रीमती जी. दुर्गाबाई : क्या डॉ. अम्बेडकर एक बात स्पष्ट करेंगे? प्रविष्टि वेश्यावष्त्ति के विनियमन अथवा प्रतिबंध के विषय में है। मैं ’विनियमन’ का अर्थ नहीं समझती और मैं सोचती हूँ, यह पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : राज्य उनको विनियमित कर सकता है और प्रतिविष्ट भी कर सकता है। राज्य इसे कर सकते हैं।

(संशोधन अस्वीकार किया गया।)

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नई प्रविष्टि 88-क

* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं 58 सदस्यों द्वारा पेश किए गए संशोधन को स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ।

श्री महावीर त्यागी : क्या मैं आपको सूचित करूँ श्रीमन, कि सदन का बड़ा भाग प्रविष्टि को छोड़ना पसंद करेगा इसलिए अनुच्छेद को प्रारूपण समिति द्वारा विचार करने से रोकने के लिए आप सहमत हो?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, यदि इस संशोधन को पेश करने वाला पेशकर्ता इसे पेश करने की चिंता करता है, तो मैं इसे स्वीरकार करने के लिए तैयार हूँ।

श्री रामनाथ गोयनका (मद्रास : सामान्य) : श्रीमान, दूसरे दिन आपने डॉ. अम्बेडकर से बदले हुए प्रस्ताव के साथ तैयार रहने के लिए निवेदन किया था। माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमान, संशोधन यहाँ है।

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 3 सितम्बर, 1949, पृ. 960-963