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श्री रामनाथ गोयनका : जो सुझाव मैं देता हूँ वह यह है कि हम प्रारूपण समिति के सम्पर्क में रहें और सभी को स्वीकार्य सूत्र पर पहुंचे।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यह वह सूत्र है जिसका प्रस्ताव आपने किया था।
श्री रामनाथ गोयनका : हम आपसे विचार-विमर्श करने का लाभ उठायेंगे।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, यदि वे इसे पेश करते है तो मैं प्रविष्टि 88-क स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ।
श्री एस. नागप्पा : यह पेश की जा चुकी है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यह अभी पेश नहीं हुई है। वह सूची की प्रविष्टि 88क थी। राज्य सूची I में नहीं।
एतराज हुए थे कि वह नियमानुसार नहीं थी और उसे पेश नहीं किया गया था। इसलिए क्या श्री गोइनका इसे पेश करना चाहेंगे................ *
श्री देश बंधु गुप्ता : श्रीमन, मैं पेश करता हूँ कि इस विषय को रोक लिया जाए।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : क्यों? हमने पूरी सूची को समाप्त करने की कोशिश की। इसलिए ही हमने शीघ्रता की, बहुत से सदस्यों को बोलने की आज्ञा नहीं दी। अब हमारे पास बहुत से सदस्यों द्वारा हस्ताक्षर किया हुआ स्पष्ट संशोधन है, मैं नहीं समझता कि इसे क्यों रोका जाए?
श्री देशबंधु गुप्ता : यह स्पष्ट शक्ल में नहीं है जैसा डॉ. अम्बेडकर ने स्वयं देखा कि मसौदे में कुछ एतराज के योग्य है और वे उससे अच्छे मसौदे से हमारी सहायता के लिए तैयार थे।
माननीय सभापति : अन्य दिन डॉ. अम्बेडकर को जैसा मैंने समझा, केवल प्रश्न था कि यह सूची I में हो अथवा सूची II में। उन्होंने कहा कि सिद्धांत का प्रश्न तय किया जाए।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यदि आप इसे सूची I में रखना चाहते हैं, मैं माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यदि आप इसे सूची
इसे स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ।
माननीय सभापति : वह विशेष स्थान जहाँ यह प्रविष्टि जाएगी, प्रारूपण समिति के लिए छोड़ दिया जाए।
* ख्., ...........से रुकावट इंगित होती है।