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श्री रामनाथ गायनका : लेकिन प्रविष्टि में सूची II के लिए अपवाद की व्यवस्था होगी, समाचार पत्रों को छोड़कर सामान की बिक्री।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यह बिल्कुल भी अनुवर्ती संशोधन नहीं है। दोनों संशोधन बिल्कुल स्वतंत्र हैं। एक संशोधन यह है कि प्रविष्टि को अतिरिक्त नई प्रविष्टि जिसे 88-क कहा जाता है, जोड़ कर बढ़ाया जाए। तब यहाँ दूसरा संशोधन है जो सूची II की प्रविष्टि 58 के संशोधन का संशोधन है जो बिक्री कर के बारे में है वह संशोधन कहता है कि ’सामान’ शब्द उस योग्य बनाया जाए कि समाचार पत्र को छोड़ दिया जाए। उसे उसके गुणों पर देखा जाए। फिलहाल प्रश्न जिस पर हमें विचार करना है यह है कि जो शब्द पेश किए गए हैं उनके साथ 88-क को जोड़कर सूची I को बढ़ाया जाए।
श्री रामनाथ गोयनका : स्थिति यह है। हमने सूची I में एक प्रविष्टि प्रस्तावित की है कि विज्ञापनों सहित समाचार पत्रों के कर सूची I को स्थानांतरित कर दिया जाए और राज्यों को समाचार पत्रों पर कर लगाने तथा कर वसूल करने का अधिकार न हो। अतः सूची I में प्रविष्टि 58 में संशोधन के संशोधन सं. 122 का अनुवर्ती संशोधन संख्या 57 है। इस प्रकार, यह दोनों संशोधन एक साथ लिए जाने चाहिए। कल जब सूची I में प्रविष्टि 58 का प्रश्न हमारे सामने आया आपने उस समय तक रोक रखा था जब तक आपने नियम बताये और कहा कि इन प्रविष्टियों पर फैसला एक साथ होगा।
मननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : उन्हें एक के पश्चात एक लो। दोनों संशोधनों को एक के पश्चात् रख दो।
श्री रामनाथ गोयनका : श्रीमन, क्या मैं सुझाव दूँ कि हम प्रविष्टि 58 को सूची II में पहले रखें और तब 88-क?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : आप जैसा चाहें इसे कर सकते हैं लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूँ कि दूसरे संशोधन पर मतदान विशेष प्रकार से प्रथम पर मतदान से असंगत तरीके से होगा। सदन एक को स्वीकार करने और दूसरे को
खारिज करने के लिए स्वतंत्र है।
श्री रामनाथ गोयनका : इस मामले पर मैं आपका फैसला पसंद करूंगा। यदि समाचार पत्रों के करों को सूची I में स्थानांतरित करते हैं तो यह सूची II में कोई स्थान प्राप्त नहीं कर सकेगी। यदि इसको सूची I में स्थान प्राप्त होता है तो सूची II से बाहर निकल जाएगी।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यह सूची II के बाहर जाएगा जहाँ तक करों का संबंध है। लेकिन जहाँ तक सामान की बिक्री का संबंध है यह रहेगा। क्या आप