नई प्रविष्टि 88 क - Page 273

252 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इसे भी बाहर चाहते हैं? यदि मैं समझता हूँ आपका उद्देश्य दोहरा है जैसे समाचार पत्रों पर कोई कर न लगाया जाए और बिक्री कर कानून (अधिनियम) के अधीन कोई शुल्क न लगाया जाए। मैं स्पष्ट रूप से आपको दोनों लाभ देने के लिए तैयार नहीं हूँ।

श्री रामनाथ गोयनका : श्रीमन, क्या मैं आपको यह विषय सोमवार सुबह तक रोकने के लिए निवेदन कर सकता हूँ ताकि हम एक साथ मिलकर विचार कर आपके पास आएं क्योंकि हमारा यह इरादा है। हम साधारण व्यक्ति हैं और हम डॉ. अम्बेडकर द्वारा मार्गदर्शित होंगे। कुल कर राज्यों से लेकर केंद्र को दिए जाएँ। यदि वह उद्देश्य पूरा नहीं हो तो मुझे डर है कि दूसरे अन्य संशोधन पेश करने होंगे जो हमारे उद्देश्यों को पूरा करेंगे। ये हमारे इरादे हैं।

माननीय सभापति : डॉ. अम्बेडकर। यदि यह विषय रोक दिया जाए तो क्या आप एतराज करेंगे?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : इसके बारे में मैं बिल्कुल स्पष्ट रहूँगा। मुझे प्रविष्टि 88-क स्वीकार करने का जनादेश है। मुझे उस आदेश को मानना है और प्रविष्टि 88-क स्वीकार करनी है। दूसरी कोई अन्य वस्तु (संशोधन संख्या 122) इस प्रकार मानने के लिए नहीं है। मुझे विश्वास है कि इसे स्वीकार करना कठिन होगा। किसी प्रकार के करों से समाचार पत्रों की मुक्ति मेरे लिए असंभव प्रस्ताव है।

श्री रामनाथ गोयनका : यह ऐसा नहीं है। मैं करों को केन्द्र के लिए छोड़ना चाहता हूँ न कि प्रदेशों के लिए। यदि मैं डॉ. अम्बेडकर से कहूँ कि आदेश यह था कि इसे प्रदेशों से हटा लिया जाए।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : आप मेरे लिए जनादेश का अर्थ लगाने के लिए नहीं हैं। मैं जानता हूँ यह क्या है? मेरे लिए यह बिल्कुल स्पष्ट है।

श्री रामनाथ गोयनका : जैसा यह है, मैं आप के लिए निर्वचन कर रहा हूँ। (रुकावट)

श्री देशबंधु गुप्ता : चूंकि डॉ. अम्बेडकर ने जनादेश का हवाला दिया है इसलिए मुझे स्पष्ट कर देना चाहिए कि जब यह प्रश्न उस प्राधिकारी के पास ले जाया गया जिसने जनादेश दिया था तो यह पूरी तरह स्पष्ट था कि दो संशोधन एक साथ गए थे। हम इस कर को केंद्रीय कर रखना चाहते थे न कि केंद्रीय तथा प्रांतीय।

मननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : किसी अन्य स्थान पर चर्चित विषयों को यहाँ उल्लेख करना सही नहीं है। लेकिन, जैसा मैंने कहा, मैं उस जनादेश को मानने के लिए तैयार विषय मेरे मित्रों द्वारा मेरे द्वारा कि दूसरे स्थान पर कही गई उस बात