254 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
द्वारा प्रतिवेदन - ऐसे प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, जिसमें अनुसूचित
क्षेत्र हैं, प्रतिवर्ष या जब भी राष्ट्रपति इस प्रकार अपेक्षा करे, उस राज्य
के अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन के संबंध में राष्ट्रपति को प्रतिवेदन देगा
और संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार राज्य को उक्त क्षेत्रों के
प्रशासन के बारे में निदेश देने तक होगा।
भाग ख
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अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों
का प्रशासन और
- जनजाति सलाहकार परिषद - (1) ऐसे प्रत्येक राज्य में, अनुसूचित क्षेत्र
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हैं और यदि राष्ट्रपति ऐसा निदेश दे तो, किसी ऐसे राज्य में भी जिसमें अनुसूचित जनजातियां हैं किंतु अनुसूचित क्षेत्र नहीं हैं।
- संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 29 और अनुसूची
द्वारा प्रथम अनुसूची के भाग क या भाग ख में विनिर्दिष्ट राज्य अभिप्रेत
है परंतु शब्दों और अंकों का लोप किया गया।
- पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम 1971 (1971 का 81) की धारा 7
द्वारा (21-1-1972 से) ’असम राज्य’ के स्थान पर प्रतिस्थापित।
- संविधान (उनचासवां संशोधन ) अधिनियम 1984 की धारा 3 द्वारा
(1-4-1985) से ’और मेघालय’ के स्थान पर प्रतिस्थापित।
एक जनजाति सलाहकार परिषद स्थापित की जाएगी जो बीस से अधिक सदस्यों से मिलकर बनेगी जिनमें से यथाशक्य निकटतम तीन चौथाई उस राज्य की विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधि होंगेः
परंतु यदि उस राज्य की विधानसभा में अनुसूचित जनजितयों के प्रतिनिधियों की संख्या जनजाति सलाहकार परिषद में ऐसे प्रतिनिधियों से भरे जाने वाले स्थानों की संख्या से कम है तो शेष स्थान उन जनजातियों के अन्य सदस्यों से भरे जाएंगे।
(2) जनजाति सलाहकार परिषद का यह कर्त्तव्य होगा कि वह उस राज्य की अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और उन्नति से संबंधित ऐसे विषयों पर सलाह