भाग ख - अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियांंं का प्रशासन और नियंत्रण - Page 276

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दे जो उसको रज्यपाल * द्वारा निर्दिष्ट किए जाएं।

(3) राज्यपाल #

(क) परिषद के सदस्यों की संख्या को, उनकी नियुक्ति की और परिषद के अध्यक्ष तथा उसके अधिकारियों और सेवकों की नियुक्ति की रीति को;

(ख) उसके अधिवेशनों के संचालन तथा साधारणतया उसकी प्रक्रिया को और

(ग) अन्य सभी आनुषंगिक विषयों को,

यथास्थिति विहित या विनियमित करने के लिए नियम बना सकेगा।

  1. अनुसूचित क्षेत्रों को लागू विधि - (1) इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी, राज्यपाल लोक अधिसूचना द्वारा निदेश दे सकेगा कि संसद का या उस राज्य के विधानमंडल काकोई विशिष्ट अधिनियम उस राज्य के अनुसूचित क्षेत्र या उसके किसी भाग को लागू नहीं होगा अथवा उस राज्य के अनुसूचित क्षेत्र या उसके किसी भाग को ऐसे अपवादों और उपांतरणों के अधीन रहते हुए लागू होगा जो वह अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे और इस उपपैरा के अधीन दिया गया कोई निदेश इस प्रकार दिया जा सकेगा कि उसका भूतलक्षी प्रभाव हो।

(2) राज्यपाल किसी राज्य में किसी ऐसे क्षेत्र को शंति और सुशासन के लिए विनियम बना सकेगा जो तत्समय अनुसूचित क्षेत्र है। विशष्टितया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डालें बिना, ऐसे विनियम कृ

(क) ऐसे क्षेत्र की अनुसूचित जनजातियों के सदसयों द्वारा या उनमें भूमि के अंतरण का प्रतिषेध या निर्बंधन कर सकेंगे;

(ख) ऐसे क्षेत्र की जनजातियों के सदस्यों को भूमि के आबंटन का विनियमन कर सकेंगे;

(ग) ऐसे व्यक्तियों द्वारा जो ऐसे क्षेत्र की अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों को धन उधार देते हैं, साहूकार के रूप में कारबार करने का विनियमन करसकेगे।

(3) ऐसे किसी विनियम को बनाने में जो इस पैरा के उपपैरा (2) में निर्दिष्ट है, राज्यपालकृ संसद के या उस राज्य के विधानमंडल के अधिनियम का या किसी विद्यमान विधि का, जो प्रश्नगत खेत्र में तत्समय लागू है, निरसन या संशोधन कर सकेगा।

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 3 सितम्बर, 1949, पृ.

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