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भाग घ
अनुसूची का संशोधन
- अनुसूची का संशोधन - (1) संसद, समय-समय पर विधि द्वारा, इस अनुसूची के उपबंधों में से किसी का, परिवर्धन, परिवर्तन या निरसन के रूप में, संशोधन कर सकेगी और जब अनुसूची का इस प्रकार संशोधन किया जाता है तब इस संविधान में इस अनुसूची के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह इस प्रकार संशोधित ऐसी अनुसूची के प्रति निर्देश है।
(2) ऐसी कोई विधि, जो इस पैरा के उपपैरा (1) में उल्लिखित है, इस संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजनों के लिए इस संविधान का संशोधन नहीं समझी जाएगी।
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पांचवीं अनुसूची
अनुच्छेद 215-क(क) और 215-ख(1)
अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण
के बारे में उपबंध
भाग 1
साधारण
- निर्वचन - इस अनुसूची में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,
’राज्य’ पद से प्रथम अनुसूची के भाग 1 या भाग 3 में तत्समय विनिर्दिष्ट
राज्य अभिप्रेत है। अनुसूचित क्षेत्रों में किसी राज्य की कार्यपालिका शक्ति - इस अनुसूची
के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किस राज्य की कार्यपालिका शक्ति का
विस्तार उसके अनुसूचित क्षेत्रों पर है।
- अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन के संघ में भारत सरकार को राज्यपाल या
शासक द्वारा प्रतिवेदन देगा और संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार
राज्य की उक्त क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में निर्देश देने तक होगा।