नया अनुच्छेद 148 अ - Page 28

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जिन्हें संसद आवश्यक मान सकती है।

(3) उपरिलिखित कोई भी नियम अनुच्छेद 304 के लिए संविधान का संशोधन नहीं माना जायेगा।“

जैसा कि माननीय सदस्य पायेंगे यह नया अनुच्छेद 148अ दो संभावनायें व्यक्त करता हैः ( i ) उन राज्यों में द्वितीय सदन के उन्मूलन के लिए जिनमें संविधान की शुरूआत पर द्वितीय सदन होगा ( ii ) उस राज्य में विधानपरिषद की उत्पत्ति के लिए जिसने संविधान की शुरूआत में विधानपरिषद की उत्पत्ति करने का निर्णय लिया है लेकिन बाद में उसके गठन का निर्णय कर सकता है। ख्’,

विधानपरिषद के गठन के लिए इस अनुच्छेद का उपबंध भारत सरकार अधिनियम अनुच्छेद 60 में निहित उपबंधों का तथा अनुच्छेद 308 का जो उसके उन्मूलन की व्यवस्था करता है बहुत समीपता से अनुकरण करता है। यहाँ उत्पत्ति और उन्मूलन की जो प्रक्रिया अपनायी गई है वह यह है कि मामले को वास्तव में निचले सदन पर छोड़ दिया जाता है जो कि प्रस्ताव द्वारा किसी भी प्रक्रिया की अपने निर्णय के आधार पर सिफारिश कर सकता है। या तो द्वितीय सदन के उन्मूलन या उसकी उत्पत्ति में किये गये किसी बदलाव को सरल बनाने के लिए, व्यवस्था की गई है कि ऐसा कानून संविधान का संशोधन नहीं माना जायेगा ताकि कठिन प्रक्रिया जिसकी संविधान के संशोधन के लिए प्रारूप संविधान में व्यवस्था है का निराकरण किया जा सके।

मैं इस सदन में इस अनुच्छेद की सिफारिश करता हूँ।

* * * *

* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं नहीं समझता कि किसी उत्तर की

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आवश्यकता है।

माननीय सभापति : मैं अब संशोधनों पर मतदान कराऊंगा। मैं प्रो. सक्सेना का संशोधन पहले लूंगा और इसको दो भागों में रखूंगा।

[ तीन संशोधनों को नकार दिया गया, एक वापस ले लिया गया और डॉ. अम्बेडकर का प्रस्ताव जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है अपना लिया गया। नया अनुच्छेद 148अ संविधान में जोड़ दिया गया ]

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, 30 जुलाई, 1949, पृ. 20