भाग घ - अनुसूची का संसोधन - Page 281

260 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

ही, परिवर्तन कर सकेगा,

(ग) किसी राज्य की सीमाओं के किसी परिवर्तन पर या संघ नए

राज्य के प्रवेश पर या नए राज्य की स्थापना पर ऐसे किसी

क्षेत्र को, जो पहले से किसी राज्य में सम्मिलित नहीं है,

अनुसूचित क्षेत्र या उसका भाग घोषित कर सकेगा, किसी राज्य

या राज्यों के संबंध में इस पैरा के अधीन किए गए आदेश

या आदेशों को विखंडित कर सकेगा और संबंधित राज्य के

राज्यपाल से परामर्श करके उन क्षेत्रों को, जो अनुसूचित क्षेत्र

हांगे, पुनः परिनिश्चित करने के लिए नए आदेश कर सकेगा,

और ऐसे किसी आदेश में ऐसे आनुषंगिक और परिणामिक

उपबंध हो सकेंगे जो राष्ट्रपति को आवश्यक और उचित प्रतीत

हों, किंतु जैसा ऊपर कहा गया है उसके सिवाय इस पैरा के

उपपैरा (1) के अधीन किए गए आदेश में किसी पश्चात्वर्ती

आदेश द्वारा परिवर्तन नहीं किया जाएगा।

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भाग 4
अनुसूची का संशोधन
  1. अनुसूची का संशोधन-(1) संसद् समय-समय पर विधि द्वारा इस अनुसूची
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के उपबंधों में से किसी का, परिवर्धन, परिवर्तन या निरसन के रूप में,

संशोधन कर सकेगी और जब अनुसूची का इस प्रकार संशोधन किया

जाता है तब इस संविधान में इस अनुसूची के प्रति किसी निर्देश का यह

अर्थ लगाया जाएगा कि वह इस प्रकार संशोधित ऐसी अनुसूची के प्रति

निर्देश है।

(2) ऐसी कोई विधि, जो इस पैरा के उपपैरा (1) में उल्लिखित है, इस

संविधान के अनुच्छेद 304 के प्रयोजनों के लिए इस संविधान का

संशोधन नहीं समझी जाएगी।

पाँचवी अनूसूची में संशोधित तथा सदन के सम्मुख प्रस्तुत मुख्य बदलावों के बारे में संक्षेप में स्पष्ट करना चाहूँगा। प्रथम मुख्य बदलाव पैरा 4 में है जो जनजाति सलाहकार परिषद बनाने के बारे में है। पैरा मूलरूप में मसौदा संविधान में था, जहाँ अनुसूचित क्षेत्र अथवा जनजाति है उस प्रत्येक राज्य में जनजाति सलाहकार परिषद रखना बाध्यताकारी था। यह महसूस किया गया कि राज्य के लिए जहाँ