भाग घ - अनुसूची का संसोधन - Page 284

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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : हमारे पास प्रतियाँ नहीं हैं। हम नहीं जानते कि वे किस बारे में बात कर रहे हैं।

माननीय सभापति : डॉ. देशमुख का संशोधन प्रातः 9.20 पर आया। डॉ. सक्सेना का प्रातः 8.58 पर आया। तकनीकी तौर पर सदन की बैठक आरंभ होने से थोड़ा पहले लेकिन मैं समझता हूँ कि यह दूसरे सदस्यों के लिए बहुत असुविधाजनक है।

डॉ. पी. एस. देशमुख (सी. पी. बरार : सामान्य) : मेरे संशोधन प्रारूपण की प्रकृति के हैं।

माननीय सभापति : बहुत अच्छा, यह प्रारूपण समिति को दे दिये जायेंगे। मैं नहीं सोचता कि आपके संशोधनों में कोई सार है, प्रो. सक्सेना?

* * * *

* माननीय सभापति : अब मैं बहस को बन्द करना चाहता हूँ। क्या डॉ. अम्बेडकर कुछ कहना चाहते हैं?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्री मुंशी ने हर बात कह दी है जो कहना आवश्यक थी मैं नहीं समझता कि मैं कुछ भी लाभदायक जोड़ सकता हूँ।

माननीय सभापति : तब मैं संशोधनों को मतदान के लिए रखूँगा।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : मेरे संशोधन मतदान के लिए रखना आवश्यक नहीं हैं? लेकिन उनपर प्रारूपण समिति द्वारा विचार होना चाहिए।

पैरा 3 पांचवी अनुसूची में जोड़ा गया।

छठवीं अनुसूची

** माननीय सभापति : अब हम छठवीं अनुसूची पर आते हैं। माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमान, मेरा प्रस्ताव हैः

“कि पैरा 1 के 3 पैरा (1) में “जनजाति क्षेत्र“ शब्द से पूर्व इस पैरा के उपबन्ध के अधीन “शब्द रखे जाय“ मूलरूप में, मसौदे में यह कहा गया था कि जनजाति क्षेत्र वे हैं जो अनुसूची से जुड़ी तालिका में सम्मिलित थे। तालिका में उन क्ष्ेत्रों की सीमाऐं परिनिश्चित करने की शक्तियाँ नहीं दी गई थीं। यह महसूस किया जाता है कि यह आवश्यक है कि तालिका में सम्मिलित क्षेत्रों की सीमाओं को परिनिश्चित * ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 5 सितम्बर, 1949, पृ. 979

** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 5 सितम्बर, 1949, पृ. 1001-1002