भाग घ - अनुसूची का संसोधन - Page 285

264 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

करने की शक्तियां राज्यपाल को दी जाएँ। राज्यपाल को यह शक्तियाँ देने के लिए आवश्यक है कि इस संशोधन के शब्दों को जोड़ा जाए।

माननीय सभापति : संशोधन संख्या 99 भी पैरा 1 से सम्बन्धित है।

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माननीय सभापति : हाँ।

“कि पैरा 1 के उपपैरा (3) के स्थान पर निम्नलिखित उपपैरा रखा जाए -

(3) राज्यपाल को सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा :

(क) उक्त तालिका के भाग 1 में कोई क्षेत्र शामिल कर सकेगा।

(ख) नया स्वायशासी जिला बना सकेगा,

(ग) किसी स्वाशासी जिले का क्षेत्र बढ़ा सकेगा,

(घ) किसी स्वशासी जिले का क्षेत्र घटा सकेगा,

(ड.) दो या अधिक स्वशासी जिलों को अथवा उनके भागों

को एकीकृत कर सकेगा जिससे एक स्वशासी जिला बन

सके।

(च) किसी स्वायत्तशासी जिले की परिभाषा करना।

“ऐसा होने पर इस अनुसूची के पैरा 14 के उपपैरा (1) के अधीन नियुक्त आयोग की रिपोर्ट पर विचार के पश्चात् सिवाय उस उपपैरा क (ख) (ग) (घ) और (ड.) के

खण्ड के अधीन राज्यपाल द्वारा कोई आदेश नहीं किया जाएगा“।

इस संशोधन में वे नई बातें जिनकी ओर ध्यान आकर्षित किया जाना चाहिए मैं उपपैरा (3) के खण्ड (ड़) और (च) में सम्मिलित हैं। जैसा आवश्यक है क्योंकि किसी विशिष्ट कार्यकलाप में, यह आवश्यक हो सकता है कि दो या अधिक स्वशासी जिले एक साथ जोड़े जाएं। उपखण्ड (च) में अन्तर्विष्ट शक्ति भी आवश्यक हैं, क्योंकि यदि किसी प्रकार का बाद-विवाद विभिन्न जनजातियों में है तो सीमाओं की परिनिश्चित करना वाँछनीय है हो सकता है यह परन्तुक एक परिवर्तन का समावेश करता है मूल परन्तुक इस परन्तुक की तुलना करने पर यह दिखाई देगा कि उपपैरा (3) के 2 परन्तुक थे। प्रथम परन्तुक में खण्ड (ख) अथवा (ग) के अधीन राज्यपाल आयोग की सिफारिश पर कार्य कर सकता था। लेकिन, यदि खण्ड (घ) अथवा (ड़) के अधीन कार्य करने की इससे अपेक्षा की जाए तो सम्बन्धित स्वायशासी जिलों की जिला सभाओं के प्रस्ताव रखना आवश्यक होगा। यह महसूस किया जाता है कि दो परन्तुकों के द्वारा उपखण्ड (3) के विभिन्न भागों के लिए भेदभाव आवश्यक नहीं है। आयोग की