भाग घ - अनुसूची का संसोधन - Page 286

265

रिपोर्ट पर विचार करने के पश्चात् राज्यपाल के लिए इसे एक रूप बनाना आवश्यक है जिसकी नियुक्ति इस अनुसूची के पैरा 14 के उपपैरा (1) में प्रस्तावित है।

माननीय सभापति : इस अनुसूची के बारे में, जैसे सम्पूर्ण अनुसूची बदली नहीं गई है लेकिन कुछ पैरा के लिए कुछ संशोधन सुझाये गये हैं, मैं इन्हें पैरा दर पैरा लेने का प्रस्ताव करता हूँ। प्रथम पैरा के बारे में, दो संशोधन हैं जो प्रारूपण समिति के नाम पर पेश किये गये हैं। अब मैं दूसरे संशोधन को लूंगा जिनकी सूचना दी जा चुकी है। संशोधनों की सूची की दूसरी पुस्तक में कुछ छप चुके हैं।

(संशोधन 3489, 3490 और 3491 पेश नहीं हुए।)

यहाँ एक संशोधन है कि पैरा 1 से 16 तक छोड़ दिये जाए। मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि क्या इन्हें लूं।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : इन्हें लेने की आवश्यकता नहीं है।

sMd j
* * * *

* माननीय सभापति : डॉ. अम्बेडकर, क्या आप कुछ कहना चाहेंगे?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमान, यहाँ केवल दो प्रश्न हैं जो इन संशोधनों पर टिप्पणी करने के समय उठाये गये थे, जो उत्तर चाहते हैं। पहला प्रश्न है जिसे श्री चाल्हिया ने संशोधन पटल पर रखा था क्यांकि मानों पांचवी अनुसूची की भांति छठी अनुसूची प्रारूपण समिति और असम के प्रधानमंत्री मेरे मित्र श्री निकोल्स के बीच हुए समझौते के परिणामस्वरूप सामने आई और जिस सभा में श्री चाल्हिया भी उपस्थित थे और उन्होंने नयी अनुसूची को स्वीकार किया था जैसा प्रारूपण समिति द्वारा संशोधित किया गया था तो भी, अपने मन में जो शंका वह पाले हैं उसे स्पष्ट करने में अधिक समय नहीं ले सकते कि आयोग कौन बनायेगा, कौन उसका सदस्य होगा। और आयोग से सम्बन्धित अन्य सदस्य कौन होंगे? मैं समझता हूँ कि श्री चाल्हिया ने सावधानी से केवल छठी अनुसूची के शब्दों को पढ़ा और उन्होंने देखा होगा कि आयोग की नियुक्ति में राज्यपाल अपने विवेकाधिकार को प्रयोग नहीं कर रहा है। राज्य पटल के पास कोई विवेकाधिकार नहीं छोड़ा है। ऐसा होने से यह बिल्कुल स्पष्ट है कि आयोग की सलाह लेने में, और उसके संदर्भ में शर्तों की परिभाषा करने में राज्यपाल को स्थानीय मंत्री सलाह देंगे, और मैं नहीं समझता कि कोई ऐसा भय अवश्य होगा जो उन्होंने प्रकट किया है।

अब, मेरे मित्र बृजेश्वर प्रसाद के संशोधन के सम्बन्ध में, मैं समझता हूँ यह एक

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 5 सितम्बर, 1949, पृ. 1004-1005