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पैरा 2
आज्ञा चाहता हूँ।
“कि पैरा 2 के उपपैरा (1) में “बीस से कम और चालीस से अधिक सदस्य“ शब्दों के स्थान पर “चौबीस से अधिक सदस्य“ शब्द रखे जाएँ।’’
यह संशोधन पुरःस्थापित किया गया है क्योंकि यह महसूस किया गया था कि मूल संख्या चालीस बहुत बड़ी हो जायेगी।
श्रीमान, मेरा प्रस्ताव है :
“कि पैरा 2 का उपपैरा (2) लुप्त कर दिया जाय।“ इसका कारण यह है कि क्योंकि चुनाव क्षेत्रों का परिसीमन हम संविधान में उपबंधित करने के स्थान पर नियमों के लिए छोड़ने का प्रस्ताव करते हैं।
श्रीमान, मेरा प्रस्ताव है :
“कि पैरा 2 के उपपैरा (7) के खण्ड (घ) के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड जोड़ा जाएः-
(घघ) “ऐसी परिषदों सभाओं के सदस्यों की पदावधि“ नियम बनाने वाली शक्तियों में से निकाल दिया गया था।
* * * *
** माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमान, यदि आप चाहते हैं, तो इस स्तर पर मैं अपने कुछ अनुभव रखूँगा और कदाचित बहुत से लोग तब बोलना पसन्द नहीं करेंगे, मैं समझता हूँ कि ये सभी शंकायें, दूर हो चुकी होंगी।
प्रो. शिब्बन लाल सक्सेना : मैं केवल यह कहना चाहता था कि यदि यह योजना स्थायी संविधान में रखी जा रही है तो इसका अर्थ यह होगा कि असम के कुछ क्षेत्र सदैव के लिए संसद के नियंत्रण से दूर रहेंगे........
माननीय सभापति : पूरी अनुसूची को अस्वीकार करने के लिए संसद को शक्तियां पैरा 20 के अधीन दी गई हैं, यदि वह आवश्यक समझे। आप इससे अधिक क्या चाहते हैं?
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 5 सितम्बर, 1949, पृ. 1007
** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 6 सितम्बर, 1949, पृ. 1013