पैरा 2 - Page 292

271

द्वारा बनाये कानून क्यों नहीं लागू होने चाहिएं। साधारणतः स्थानीय विधानमण्डल द्वारा बनाये गये कानून और संसद द्वारा बनाये गये कानून इन क्षेत्रों पर लागू होंगे। मैं कहता हूँ कि यह दूसरा जोड़ने वाला प्रभाव है। तो भी दूसरा जोड़ने वाला प्रभाव जिसका उल्लेख मुझे करना चाहिए जो हम यह नहीं कह रहे हैं कि राजनैतिक अधिकार अथवा शक्तियां जो हमने जनजातियों को क्षेत्रीय अथवा जिला परिषदों के गठन की हैं, प्रभाव का सम्पूर्ण क्षेत्र है जिसके वे हकदार होंगे दूसरी ओर, हमने व्यवस्था की है कि वे जनजातियाँ जो क्षेत्रीय परिषदें और जिला परिषदें रखेगी, असम विधानमंडल में काफी प्रतिनिधित्व रखेगी और संसद में भी इस प्रकार वह असम और सम्पूर्ण भारत के लिए कानून बनाने में भाग लेंगी। अब, भाग लेने के चक्र, यदि मैं ऐसा कह सकता हूँ तो, जिनका मैंने हवाला दिया है, असम विधानमण्डल में प्रतिनिधित्व तथा संसद में प्रतिनिधित्व, संसद द्वारा बनाये गये कानून और असम विधानमंडल द्वारा बनाये गए कानूनों का लागू होना बाध्य करने वाली शक्तियाँ ही हैं, मैं जानना चाहूँगा कि सम्पूर्ण, राज्य के राजनैतिक जीवन से परिषदों और जिला परिषदों को बांधने के लिए हम कौन-सी आबद्धकर शक्तियां का प्रावधान कर सकते थे।

इसलिए, मैं सहमत नहीं कि क्षेत्रीय परिषदों और जिला परिषदें बनाकर हमने असम की जनता को दो अलग-अलग भागों में काट दिया है- जैसे जनजातियाँ और गैर-जनजातियाँ। दूसरी ओर हमने व्यवस्था की है, जैसा मैंने कहा, भाग लेने के बहुत से चक्र हैं जिसमें राजनैतिक तौर पर दोनों एक साथ आ सकते हैं, एक दूसरे को प्रभावित कर सकते हैं, एक दूसरे के सहायक हो सकते हैं और एक दूसरे से कुछ सीख सकते हैं। मुझे इसके बारे में विश्वास है कि जो तर्क क्षेत्रीय परिषदों और जिला परिषदों के बनाने के विरुद्ध दिए गये हैं गलतफहमी तथा अनुसूची के उपबन्धों को अपर्याप्त पढ़ने का कारण है।

श्रीमान, मेरे मित्र श्री चाल्हिया द्वारा अपना संशोधन रखने में अपनाए गए दृष्टिकोण पर तथा, मेरे मित्र श्री रोहिनी कुमार चौधरी द्वारा पेश किये गये संशोधन पर भी मुझे ताज्जुब था। मैं महसूस करता हूँ कि वे अब प्रसन्न व संयुक्त परिवार नहीं हैं। इसका कारण क्या है, मैं नहीं समझता, लेकिन मैं कह सकता हूँ कि जब यह संशोधन किए गये थे, तो श्री चाल्हिया की सहमति से किए गये थे, वे असम के प्रधानमंत्री की सहमति से, और मेरे मित्र श्री निकोल्स रॉय की भी स्वीकृति से, जो इस सम्बन्ध में मुख्य पार्टी है, किए गए थे। मैं देखता हूँ कि वे इस समय एक दूसरे की उन तथ्यों के कारण आलोचना करने में लगे हैं जो इस अनुसूची के बाहर हैं। इस नाराजगी के लिए, खुली बगावत और विद्रोह के लिए जो एक के विरुद्ध दूसरे ने दर्शाया है कोई कारण मुझे नहीं मिलता और इसीलिए मैं उस में जाना नहीं चाहता जिसे मैं शुद्ध घरेलू झगड़ा कहता हूँ।