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272 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री रोहिनी कुमार चौधरी : क्या डॉ. अम्बेडकर हमारे विरुद्ध बुरा बोलने के हकदार हैं?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं कोई गलत बात नहीं कह रहा हूँ। श्रीमान मैं केवल कह रहा था कि यह घरेलू झगड़ा था जिसमें मुझे नहीं कूदना चाहिए। मेरा अपना मत है कि हमने सर्वोत्तम उपबन्ध किए हैं................. (रुकावट)।

श्री कुलाधर चाल्हिया : मैं व्यक्त सच्ची राय के लिए डॉ. अम्बेडकर द्वारा लांछन लगाने का विरोध करता हूँ।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं लांछन नहीं लगा रहा हूँ। श्री चाल्हिया प्रत्येक बदलाव के लिए भागीदार थे जो अनुसूची में किया गया था। मैं चाहूँगा कि वे मना करें। क्या वह मना कर सकते हैं?

श्री कुलाधर चाल्हिया : हाँ, मैं मना करता हूँ। मैंने भी बारडोलोई से कहा था कि मैं कुछ बातों से सहमत नहीं हूँ।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : उन्होंने भी बारडोलोई के कानों में कानाफुंसी की होगी। प्रारूपण समिति में इन बदलावों के लिए उन्होंने एक भी शब्द नहीं कहा। जैसा मैं दूसरे मामलों में करता हूँ मैंने इनके हस्ताक्षर नहीं लिए क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि कोई सदस्य अपने शब्दों से मुकर जायेगा। तो भी कुछ मैं कह रहा था वह यह है कि क्षेत्रीय परिषदों को तथा जिला परिषदों को कुछ उद्देश्यों के लिए कुछ स्वायत्तता दी जा चुकी हैं और उसी समय प्रदेश के जीवन में और सम्पूर्ण देश के जीवन में भी। यदि ये हालात जो एकीकरण के स्वरूप के हैं, नहीं जोड़ते हैं तो इनको बांध दिया गया है। जनजाति के लोगों को देश में व असम में शेष मैदानी लोगों के साथ नहीं लाते तो इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति के लिए कारण कहीं अन्यत्र मिलेगा। मेरे मित्र श्री रोहिणी कुमार चौधरी ने कहा कि यदि क्षेत्रीय परिषद बनाई जाती हैं तो जन-जातियाँ तिब्बत के लोगों और अन्य क्षेत्रों के लोगों के रास्ते पर चली जायेंगी। मैं नहीं समझता कि वह भविष्यवाणी केवल जनजाति क्षेत्र तक रहेगी। मुझे डर है कि असम भी जा सकता है इसके लिए हम संविधान में कोई उपबन्ध नहीं कर सकते। मैं इसके बारे में आश्वस्त हूँ।

श्री बी. दास (उड़ीसा-सामान्य) : क्या मैं डाँ. अम्बेडकर से पूछ सकता हूँ कि क्या उनको जानकारी है कि असम में अंगरेज एजेंट कार्य कर रहे हैं- बर्मा सीमा और करेंस और वर्मी के बीच के झगड़ों के लिए वह जिम्मेदार हैं और क्या यही ब्रिटिश एजेंट असम क्षेत्र में काम नहीं कर रहे?

मेरे मित्र निकोलस का भाषण सुनने के पश्चात् मैं सोचता हूँ कि वे जनजाति