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क्षेत्र को एक पृथक इकाई चाहते हैं जिससे कि इन जनजाति क्षेत्रों में ब्रिटिश प्रभाव बना रहे। सरकार का सदस्य होने के नाते डॉ. अम्बेडकर जानते हैं- और मैने जान लिया है कुछ जनजाति क्षेत्रों के बारे में।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : जो कुछ मैं कह सकता हूँ यह है कि यह पूर्णः संभव है कुछ रास्ते निकालना जिसके द्वारा इस बाहरी प्रभाव को हम दूर कर सकते हैं।

श्री बी. दास : प्रारूपण समिति।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : विदेशी प्रभाव को दूर करने के लिए प्रारूपण समिति कुछ नहीं कर सकती। यह किसी अन्य संस्था का काम है लेकिन मैं अपने मित्र को विश्वास दिला सकता हूँ कि इस विदेशी प्रभाव से मुक्ति पाना कठिन नहीं होगा।

(पैरा 2 संशोधित रूप में अनुसूची में जोड़ा गया।)

पैरा 3

* श्री कुलाधर चाल्हिया : वास्तव में यह संशोधन वैसा ही है जैसा मेरा था और इसीलिए डॉ. अम्बेडकर को मेरा स्वीकार करना चाहिए था बजाय इस प्रकार का जोड़ने के और अनावश्यक कानून बनाने के। प्रारूपण समिति के संशोधन के स्वीकार करने की अपेक्षा मेरा संशोधन सं. 113 स्वीकार करना बेहतर है।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : माननीय सदस्य ने इसे मेरे लिए पहले ही पेश कर दिया है। यदि आप इसे ऐसा समझेंगे मानो मैंने पेश किया है, तो वह समय बच जायेगा।

माननीय सभापति : मैं मानता हूँ कि उन्होंने पेश किया है।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर :श्रीमान क्या मैं औपचारिक ढंग से इसे पेश करूँ? माननीय सभापति : हाँ,

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मेरा प्रस्ताव है-

“कि पैरा 3 के उपपैरा (2) के पश्चात् निम्नलिखित उपपैरा जोड़ा जाए।

“(3) इस पैरा के अधीन निर्मित सभी विधियाँ तुरन्त राज्यपाल को प्रस्तुत की

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 6 सितम्बर, 1949, पृ. 1029