274 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जाएंगी जब तक उनकी अनुमति न मिल जाये तब तक उनका प्रभाव नहीं होगा।“
श्री रोहिनी कुमार चौधरी : सभापति महोदय, मैं प्रस्ताव प्रस्तुत करने की इजाजत
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चाहता हूँः
“कि सूची I के संशोधन संख्या 114 (सातवाँ सप्ताह) में पैरा 3 के प्रस्तावित उप पैरा (3) में निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाएः
’(3) इस पैरा के अधीन निर्मित सभी विधियां राज्यपाल को प्रस्तुत की जायेंगी, जो उन्हें तुरन्त राज्य के विधानमण्डल के सामने रखेगा और जब तक राज्य विधान सहमत न हो और राज्यपाल की अनुमति नहीं, तब तक उनका कोई प्रभाव नहीं होगा।“
(संशोधन अस्वीकार किया गया)
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* माननीय सभापति : डॉ. अम्बेडकर क्या आप कुछ कहना चाहेंगे? मैं नहीं समझता कि इसमें कुछ भी बहस करने के लिए है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमान, मेरे मित्र श्री चाल्हिया के संशोधन
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संख्या 113 के बारे में मैं वास्तव में नहीं समझता कि इसका क्या अर्थ है? यह कहता है “राज्यपाल विधियाँ और विनियम बनायेगा और जिला परिषद तथा क्षेत्रिय परिषद को ऐसी शक्तियाँ देगा जिन्हें राज्य विधान अनुमोदित करे।“
मैं नहीं समझता इसका क्या अर्थ है। इसलिए मैं यह कहने में असमर्थ हूँ कि मैं इसे स्वीकार करता हूँ।
मेरे संशोधन तथा मेरे मित्र श्री रोहिनी कुमार चौधरी के संशोधन के बारे में कोई अन्तर नहीं है सिवा इसके कि मेरे माननीय मित्र यह समझने में असफल रहे हैं कि “राज्यपाल“ शब्द का अर्थ क्या है। इनका कहना है कि विधियाँ असम के विधानमंडल द्वारा अनुमोदित की जाएंगी, मेरे संशोधन के अनुसार, असम के मंत्रालय के सुझाव के अनुसार राज्यपाल विधियों का अनुमोदन करेगा, क्योंकि इस समस्त योजनाओं में हम अपने विवेकानुरूप शब्दों को हटा रहे हैं। “जहाँ कहीं राज्यपाल शब्द आता है इसका अर्थ है कि मंत्रिमंडल की सलाह पर कार्य करने वाला राज्यपाल। मैं उनसे पूछना चाहूँगा क्या वह वास्तव में सोचते हैं कि स्वयं विधानमंडल द्वारा अनुमोदित विधि तथा मंत्रिमंडल की सलाह पर राज्यपाल द्वारा अनुमोदित विधि के बीच कोई गम्भीर
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 6 सितम्बर, 1949, पृ. 1031