पैरा 9 - Page 298

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श्री रोहिनी कुमार चौधरी : मैं खासतौर से उपपैरा (2) की पंक्तियाँ पढ़ता हूँ।

“....एक स्वशासी क्षेत्र के लिए क्षेत्रीय परिषदें अथवा इसके स्थान पर क्षेत्रीय परिषद द्वारा बनाया गया कोई न्यायालय अथवा यदि स्वशासी क्षेत्र के अधीन किसी क्षेत्र के बारे में, कोई क्षेत्रीय परिषदें नहीं हैं तो, ऐसे जिले के लिए जिला परिषद अथवा जिला परिषद द्वारा अपने नाम पर स्थापित कोई न्यायालय उन पक्षों के बीच जो अनुसूचित जन जातियों से सम्बन्धित है सभी सिविल मामले व मुकदमों में अपील न्यायालय की शक्तियों का प्रयोग करेगा ........“

यदि एक पक्ष अनुसूचित जनजाति नहीं है, तब क्या होगा?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यदि पक्ष ऐसे हैं जिनमें एक जनजाति है और दूसरी जनजाति नहीं है, तब साधारण विधि लागू होगी।

श्री रोहिणी कुमार चौधरी : आपने यह व्यवस्था कहाँ की है?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : इसके पश्चात् यह है। अब भी यह कहती है, ’जहाँ पक्ष है.......’ (गड़बड़ी) मैं नहीं समझता कि यहाँ कोई कठिनाई है। और मैं आशा करता हूँ कि मेरे मित्र समझ गए होंगे।

श्री रोहिणी कुमार चौधरी : श्रीमन, कोई उपबंध कहीं भी नहीं बनाया गया है।

मननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : पैरा 4 की व्यवस्था करने तक साधारण न्यायालय की अधिकारिता समाप्त कर दी गई है अन्यथा साधारण न्यायालय की अधिकारिता जारी रहती है। इस क्षेत्र में केवल यही न्यायालय नहीं होंगे, प्रदेश की सामान्य विधि प्रशासन के लिए प्रांतीय सरकार द्वारा स्थापित दूसरे न्यायालय भी होंगे।

(पैरा 4 संशोधित रूप में अनुसूची में जोड़ा गया।)

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पैरा 9

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मेरा प्रस्ताव हैः

’कि पैरा 9 का उपपैरा (1) लुप्त कर दिया जाए’

पैरा असम सरकार द्वारा स्वीकृत अनुज्ञप्ति अथवा लीज.... विचारों के लिए अथवा खदानों के खोदने के निर्देश करता है। वह मामला अब भारत सरकार पर है इसलिए इस उपपैरा का यहाँ होना अनावश्यक है।

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 6 सितम्बर, 1949, पृ. 1039