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यह पूर्व सावधानियाँ वहाँ हैं।
उनकी टिप्पणियों के संबंध में, कि जो कुछ प्रारूपण समिति ने किया है वह जंगली पर है जो अंगरेजी सरकार ने भी नहीं किया। मैं यह बताना चाहूँगा कि वह इस बात को क्यों भूल जाते हैं कि यह छोड़ा गया क्षेत्र पूर्णतः राज्यपाल के विवेकाधिकारों में था; यह उसकी कमी थी। हमने राज्यपाल के विवेकाधिकार को सर्वथा हटा लिया है। वह अब मंत्रालय की सलाह के अधीन ही कार्य कर सकते हैं।
मुझे अभी आश्चर्य है कि क्या मेरे मित्र रोहिनी कुमार चौधरी स्पष्टीकरण वक्तव्य से संतुष्ट हैं जो मैंने दिया है?
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माननीय सदस्यगण : बिल्कुल नहीं।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं जानता हूँ कि आप उससे कुछ अधिक
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चाहते हैं जो मैं दे सकता हूँ। आप डेविड कोपर फील्ड की भांति भूखे हैं जो अधिक पका हुआ खाना चाहते हैं।
(पैरा जो डॉ. बी. आर. अम्बेडकर के संशोधनों से संशोधित हुआ, अनुसूची में सम्मिलित किया गया।)
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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : क्या मैं अपने संशोधन संख्या 128 की ओर
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से जो आर्डर पेपर है, ध्यान आकर्षित कर सकता हूँ ? जैसे वह पेश किया जा रहा है, मेरे मित्र का यह संशोधन बिल्कुल अनावश्यक होगा। उनके द्वारा ऐतराज किए गये शब्दों को छोड़ने का प्रस्ताव कर रहा हूँ।
श्री कुलाधार चाल्हिया : मुझे प्रसन्नता है कि प्रारूपण समिति पर एक बार किसी प्रकार की विवेकबुद्धि प्राप्त हो गई। सौभाग्य की बात है कि प्रथम बार प्रारूपण समिति को विवेकबुद्धि प्राप्त होगी।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यह पहला अवसर है कि आपने अपने तर्कों
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से मुझे संतुष्ट किया है।
श्रीमान, अब मैं अपना संशोधन संख्या 128 पेश करूँगा। मेरा प्रस्ताव है “कि पैरा 12 के खण्ड (ख) में अधिसूचना में विर्निदिष्ट ऐसे जिले को जिलापरिषद ऐसे क्षेत्र के क्षेत्रीय परिषदों के अनुमोदन से स्पष्ट किए गये ऐसे क्षेत्र के लिए जिला परिषद अथवा क्षेत्रिय द्वारा सिफारिश किया गया जो भी संकल्प ऐसा निर्देश जारी करने के