पैरा 14 - Page 302

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* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मैं नहीं समझता कि यह संशोधन आवश्यक है। जहाँ तक कि ......

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : हाँ श्रीमान, मैं उन्हें पहले पेश करूँगा “कि पैरा 14 के उपपैरा (1) में राज्य स्वशासी जिले के पैरा 1 के उपपैरा (3) के खण्ड (ख), (ग), (घ) और (ड.) शब्दों के पश्चात् कोष्टक, शब्द और अंक रखे जायें।“

“कि पैरा 14 के उपपैरा (1) में शब्द “स्वशासी जिले, दो स्थानों पर जहाँ पर आते हैं, “स्वशासी क्षेत्र शब्द“ रखा जाए।

“कि पैरा 14 के उपपैरा (1) के खण्ड (ख) में शब्द जिले’ के पश्चात् दो स्थानों पर जहाँ यह आता हैं “स्वशासी जिले और “स्वशासी क्षेत्र शब्द“ रखे जाएँ।

इनमें से कुछ संशोधन अनुवर्ती हैं दूसरे शुद्ध मौखिक हैं।

श्री सुधीर कुमार चाल्हिया : श्री सभापति महोदय मेरा प्रस्ताव है “कि संशोधनों की सूची के संशोधन (खंड II ) संख्या 3500 और 3501 के निर्देश पैरा 14 के उपपैरा (ख) के खण्ड पश्चात् निम्नलिखित नया खण्ड जोड़ा जायः- ‘‘(घ) किसी जिला अथवा क्षेत्रीय परिषद में या किसी जनजाति क्षेत्र को मिलाना अथवा अलग करना“।

......मुझे विश्वास है कि प्रारूपण समिति आखिरकार दया करेगी यद्यपि उन्होंने क्रूरता प्रदर्शित की है और वे इसे स्वीकार करेंगे और मेरा संशोधन (घ) में सम्मिलित करेंगे, इससे खण्ड में बहत सुधार हो जाएगा।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : इस अनुसूची के पैरा 1 के लिए मैंने जो संशोधन पेश किया है, उसकी ओर मैं अपने मित्र का ध्यान आकर्षित करना चाहूँगा, जिसमें कुछ के बारे में उपपैरा (3) के उपबन्ध बदल दिए थे। यह विषय जिसकी व्यवस्था वह अब करना चाहते हैं, वह आयोग की सिफारिश पर विनियमित किया जाना है। पैरा पहले ही पारित किया जा चुका है इसलिए यह आवश्यक नहीं है।

श्री कुलाधर चाल्हियाः क्या यह संशोधन संख्या 99 है? माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : हाँ, यह 99 है।

श्री कुलाधर चाल्हिया : लेकिन, तो भी आपने आयोग को यहाँ पैरा 14 के (क), (ख), (ग) तक सीमित कर दिया है। मेरी यही कठिनाई है।

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 6 सितम्बर, 1949, पृ. 1046-1048