पैरा 14 - Page 303

282 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यदि मैं अपने मित्र के सामने उपपैरा (3) जो सम्मिलित करके अथवा जनजाति क्षेत्र को मिलाकर या अलग करके बदलने का कार्य करता है, स्पष्ट कथन करूँ, तो यह दो श्रेणियों में विभाजित है। प्रथम कथित तालिका के किसी भाग में सम्मिलित करना जो तालिका (क) है। बहुत आरंभ में राज्यपाल कर सकता है जिसके लिए आयोग की सिफारिश की आवश्यकता नहीं है। लेकिन मेरे संशोधन के अनुसार यदि कार्यवाही (ख), (ग), (घ) और (ड.) के अधीन होनी है, तब आयोग की सिफारिश आवश्यक है और जैसा मैंने कहा वह भाग सदन द्वारा पारित किया जा चुका है। अब उसे फिर से खोलना संभव नहीं है।

श्री कुलाधर चाल्हिया : अनुसूची के पैरा 14 के उपपैरा (1) के अधीन नियुक्त आयोग की रिपोर्ट पर विचार करने से आपने उसे दुबारा सीमित कर दिया है। आपने संशोधन संख्या 99 की व्यवस्था की है लेकिन इसे दुबारा सीमित कर दिया है, मैं सुनना चाहूँगा कि इसके बारे में डा. अम्बेडकर क्या कहते हैं? माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यह पैरा 14 सीमित नहीं है।

श्री टी. टी. कृष्णमाचारी : यदि माननीय सदस्य संशोधन संख्या 134 पर देखेंगे जो अनुसूची के पैरा 1 के उपपैरा (3) के खण्ड (ख) (ग) (घ) और (ड़) में वणि्र्ात विषयों को सम्मिलित करना “शब्दों को पैरा 14 के उपपैरा (1) में “राज्य में स्वशासी जिले“ के पश्चात् जोड़ना चाहते हैं तब उनका वह उद्देश्य पूरा होगा जो उनके दिमाग में है और इस संशोधन के द्वारा वह पूरा हो चुका है।

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श्री कुलाधर चाल्हिया : श्रीमन, धन्यवाद।

हो रही है। श्री चाल्हिया द्वारा पेश किया गया संशोधन इस बारे में है कि आयोग जिसकी नियुक्ति राज्यपाल द्वारा होगी, किसी नये जनजाति क्षेत्र के सम्मिलित होने और इसके अलग होने पर भी विचार नहीं करे। एक मौजूद जनजाति क्षेत्र से अलग हुआ क्षेत्र बिना इसके दूसरे जनजाति क्षेत्र में सम्मिलित होना चाहिए और इस बात की व्यवस्था यहाँ नहीं की गई है। डॉ. अम्बेडकर का संशोधन संख्या 99 जो कुछ व्यवस्था करता है वह यह है कि एक जनजाति क्षेत्र से एक क्षेत्र ले लिया जाए और दूसरे क्षेत्र में जोड़ दिया जाए लेकिन आयोग को जांच करने के लिए कोई शक्ति नहीं दी है और एक क्षेत्र बिल्कुल अलग करने की वांछनीयता की सूचना देने के लिए कोई शक्ति नहीं दी है। एक जनजाति क्षेत्र अलग करने की शक्ति केवल संसद को होगी, लेकिन इस आयोग को मामले पर कार्य करने का कोई अधिकार नहीं होगा।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यदि मैं अपने मित्र आदरणीय पंडित हृदयनाथ