284 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
विषय है जो राज्यपाल की सीमा से बाहर निकाल लिया गया है यह संसद के फैसले के लिए छोड़ दिया गया है। उपपैरा (3) के खण्ड (ख), (ग), (घ), (ड.) में अंकित विषय के बारे में आयोग राज्यपाल का मार्गदर्शन करेगा। कोई विषय जो इसके बाहर है, संसद का विषय है। संसद इस आयोग से स्वतंत्र एक आयोग नियुक्त कर सकेगी और तब कानून बना सकेगा।
प्रो शिब्बनलाल सक्सेना : इसके लिए कोई उपबंध नहीं है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : कोई उपबन्ध आवश्यक नहीं है संसद असम मंत्रालय की सलाह पर कार्य कर सकेगी। यदि संसद सोचती है कि वह सलाह स्वतंत्र नहीं है और स्वतंत्र साक्ष्य होने चाहिए तो, संसद एक आयोग नियुक्त करने के लिए और अपनी स्वयं जांच करने के लिए स्वतंत्र है।
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* श्री रोहिनी कुमार चौधरी : ........छठी अनुसूची पर वाद-विवाद करने के बारे में किसी चीज के लिए यदि असम प्रदेश के सदस्यों की सलाह मानी जाती है जो प्रधानतः असम से सम्बन्धित है, तो मैं सोचता हूँ कि आदरणीय डॉ. भीमराव अम्बेडकर किसी संशोधन को स्वीकार करने के लिए सहमत होंगे। मैं सोचता हूँ हम इस संशोधन को स्वीकार करने की आवश्यकता पर भली-भांति एकमत हैं - मैं दो मंत्रियों के बारे में नहीं जानता लेकिन हममें से शेष एकमत हैं।
प्रो. शिब्बनलाल सक्सेना : राज्यपाल आयोग में किसी को भी नियुक्त करने के लिए स्वतंत्र है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : राज्यपाल पर बिल्कुल भी प्रतिबन्ध नहीं है।
श्री रोहिनी कुमार चौधरी : मैं कहता हूँ, दो सदस्य विधानमण्डल द्वारा चुने जाने चाहिएं।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : उसे ऐसा करने से रोका नहीं गया है।
श्री रोहिनी कुमार चौधरी : ऐसा कहने में कोई हानि नहीं है। एक व्यक्ति चाहे जीये या मरे। आप क्यों कहते हैं “मरना“ मैं कहता हूँ जीते रहो। कृपया मेरा संशोधन स्वीकार कर लो।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : राज्यपाल, मंत्रालय की सलाह पर आयोग नियुक्त करने के लिए अग्रसर होगा। आप सोचते हो, आपका मंत्रालय विधानमण्डल से दो सदस्य नियुक्त नहीं करेगा।
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 6 सितम्बर, 1949, पृ. 149