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श्री रोहिनी कुमार चौधरी : मैं चाहता हूँ कि उनका चुनाव विधानमण्डल द्वारा हो। विधानसभा द्वारा चुनाव को मैं महत्व देता हूँ। मेरा विचार है कि माननीय डॉ. भीमराव अम्बेडकर भी ऐसा महत्व देंगे लेकिन उन्हें अब अपना मस्तिष्क बदल लेना चाहिए।
माननीय सभापति : श्री बृजेश्वर प्रसाद द्वारा प्रस्तावित कुछ अन्य संशोधन हैं, 209 “संसद“ के लिए “राज्य विधानमण्डल“ 210-“संघ“ के लिए “असम“, 211 “संघ- के लिए “राज्य“; 212-“राष्ट्रपति“ के लिए “राज्यपाल“; 213- “असम राज्य में“ के लिए “राज्य में“।
श्री बृजेश्वर प्रसाद : मैं इनको पेश नहीं करना चाहता।
माननीय सभापति : इस पैरा के सभी संशोधन पेश किये जा चुके हैं। डॉ. अम्बेडकर क्या आप कुछ कहना चाहेंगे ?
| csMd | j |
|---|
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : नहीं।
माननीय सभापति : अब मैं संशोधन रखूँगा।
(निम्नलिखित संशोधन स्वीकार हुए :
- संशोधनों की सूची के (पुस्तक II ) संशोधन संख्या 3500, 3501 और 3502
के स्थान पर निम्नलिखित रखे जाएँ-
“6 अनुसूची के पैरा 14 के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाए :
“राष्ट्रपति के एजेंट की भांति असम का राज्यपाल कम से कम सात सदस्यों का आयोग किसी समय नियुक्त करे जिनमें से तीन सदस्य जनजाति के होंगे और शेष प्रसिद्ध श्रेणियों में से चुने जाएंगे, नृविज्ञानी, उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश, विज्ञान तथा साहित्य के व्यक्ति राज्य में स्वशासी जिल और क्षेत्र के प्रशासन के क्षेत्र में उसके द्वारा विनिर्दिष्ट विषय की जांच और रिपोर्ट करने अथवा राज्य में साधारणतः और विशेष तौर पर स्वशासी जिला और क्षेत्र के प्रशासन पर समय-समय पर जांच करने व सूचना देने के लिए ऐसा ही आयोग नियुक्त कर सकेगाः
(क) शैक्षिक, सांस्कृतिक, चिकित्सकीय आर्थिक और धार्मिक सुविधायें
और ऐसे क्षेत्रों और जिलों में संचार;
(ख) ऐसे जिले और क्षेत्रों के बारे में नये अथवा विशेष, विधान की
आवश्यकता;