286 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(ग) जिला और क्षेत्रीय परिषदों द्वारा निर्मित विधियों के प्रशासन, विनियमन
और नियम और आयोग द्वारा अपनाई जाने वाली पद्धति की परिभाषा
करने’“।
- ‘‘पैरा 14 के उपपैरा (1) में’’ स्वशासी जिले“ शब्दों राज्य में के पश्चात्
इस अनुसूची के पैरा 1 के उपपैरा (3) के खण्ड (ख) (ग) (घ) और (ड़) में
विनिर्दिष्ट विषयों सहित शब्द, कोष्ठक, अक्षर और अंक“ अन्तःस्थापित।
- “पैरा 14 के उपपैरा (1) में स्वशासी जिले, दो स्थानों पर जहाँ यह आते
हैं शब्दों के स्थान पर “स्वशासी क्षेत्र“ शब्द रखे जाएं।“
- “कि पैरा 14 के उपपैरा 1 के खण्ड (क) और (ख) में “जिला“ शब्द के
पश्चात् दो स्थानों पर जहाँ पर आते हैं ‘‘और क्षेत्रों“ शब्द रखे जाएँ।“
- “कि पैराग्राफ 14 के उपपैरा (3) में स्वायत्तशासी शब्द ‘‘जिले के पश्चात्“
और स्वायत्तशासी क्षेत्र रखे जाएँ।“
संशोधन स्वीकार हुआ।
(पैरा 14 संशोधित रूप में अनुसूची में जोड़ा गया।)
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संशोधन संख्या 140 पेश नहीं किया गया।
* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मेरा प्रस्ताव है ऐसा इसलिए है,
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क्योंकि यह राज्यपाल को निदेश देता है जिसे अभी उसके पास छोड़ने का प्रस्ताव नहीं है।
माननीय सभापति : संशोधन संख्या 1421 हमने बहुत बार स्वेच्छा के प्रश्न पर विचार किया है। क्या उसे पेश करना आवश्यक है।
श्री बृजेश्वर प्रसाद : श्रीमन, जैसा आप मुझे निर्देश दें।
माननीय सभापति : मैं नहीं समझता कि यह आवश्यक है। संशोधन सं. 124, दुबारा “राष्ट्रपति“ के लिए राज्यपाल“ संशोधन संख्या 215 “संसद“ के लिए राज्य का विधानमण्डल, संशोधन संख्या 216, यह वही है जैसा डॉ. अम्बेडकर का। ये सभी संशाधन हैं डॉ. अम्बेडकर क्या आप कुछ कहना चाहेंगे?
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 6 सितम्बर, 1949, पृ. 1051