पैरा 16 - Page 308

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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : नहीं। जैसा मैंने कहा हम राज्यपाल से स्वेच्छा वापिस ले रहे हैं जिसे हमने मूल रूप में उसके पास छोड़ दिया था और इसलिए उपपैरा (3) इस पैरा को छोड़ देना आवश्यक है।

(डॉ. अम्बेडकर का संशोधन स्वीकार हुआ।)

(पैरा 15 संशोधित रूप में अनुसूची में जोड़ा गया।)

श्री बृजेश्वर प्रसाद : श्रीमन, मैं सुझाव दूँगा कि हम कुछ मिनट देर तक बैठेंगे और इस अनुसूची को पूरा कर देंगे।

माननीय सभापति : इसमें समय लगेगा। हम समाप्त नहीं कर सकेंगे। मैं सदन को याद दिला रहा था कि हम अपने निश्चित समय से बहुत पीछे हैं और खोये समय को प्राप्त करने के लिए कुछ करना होगा। श्री आर.के. सिधवा (मध्य प्रांत और बरार : सामान्य) : आज हमारे पास कोई

दूसरे शब्द नहीं हैं और हम दोपहर में बैठ सकते हैं।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : कल, यदि आप पसन्द करें हम बैठ सकते हैं। कुछ अनुच्छेद लेने के लिए हमने आज मसौदा समिति की बैठक बुलाई है जो विचार करने के लिए थी।

* * * *

* माननीय सभापति : यहाँ दो अन्य संशोधन हैं जो हमने समाप्त कर दिये, क्योंकि यदि उनके पास इस विषय पर कोई विचार है तो यह उसी प्रकार है जैसे श्री बृजेश्वर प्रसाद के दूसरे है। माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (बम्बई-सामान्य) : मैं असम के प्रधानमंत्री को

सुनना चाहूँगा, यदि वह इस मामले पर विचार रखना चाहेंगे। माननीय श्री गोपीनाथ बारदोलोई (असम-सामान्य) : श्रीमन, श्री सुरजीत चाल्हिया

के पैरा 16 के अभी रखे गये नियम दो के छोड़ने के संशोधन के संदर्भ में, जो कुछ मुझे कहना है वह यह है कि हर मामले में जहाँ इस प्रकार की कार्यवाही करनी है। इससे प्रभावित पक्षों को सुनने का एक अवसर दिया गया है। मैं सहमत हूँ कि इस नियम में कोई भी मशीन जो इसे कर सकती थी लिखी गई थी, इसलिए इन

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 6 सितम्बर, 1949, पृ. 1051