अनुच्छेद 150 - Page 31

10 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

हमने अनुच्छेद 148 अंगीकृत किया...

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मैं माननीय सदस्य से अनुच्छेद 167 को फिर से पढ़ने के लिए कहूँगा।

श्री एच. वी. कामथ : मैं अगली बात के बारे में बात कर रहा हूँ।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : पहली बात के बारे में क्या विचार है ? क्या आप इसके पक्ष में हैं?

श्री एच. वी. कामथ : मैं इसके पक्ष में नहीं हूँ। डॉ. अम्बेडकर कहते हैं कि अनुच्छेद 167 अयोग्यतायें निर्धारित करता है .........

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : विधानसभा और विधानपरिषद् दोनों के लिए

* * * *

श्री नजीरुद्दीन (पश्चिम बंगाल : मुसलमान) : ..... यह अनुच्छेद बहुत सरल

और अहानिकर दिखलाई देता है और इसका प्रभाव है कि विधानपरिषद् के सदस्यों की संख्या 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।

माननीय डॉ बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, मैं नियमापत्ति पर विद्रोह करता हूँ। मेरे मित्र उस प्रारूप की आलोचना कर रहे हैं जो सदन के सामने नहीं है।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : मैं यह दिखाने का प्रयत्न कर रहा हूँ कि किस तरह आज के संशोधन में यह असंतोषजनक परिस्थिति उत्पन्न हुई।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यह सदस्यों के समक्ष नहीं है।

* * * *

** माननीय डॉ बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, यहाँ चर्चा के दो बिन्दु हैं जिनका मैं सोचता हूँ उत्तर देने की आवश्यकता है। चर्चा का प्रथम बिन्दु जो श्री कामथ तथा मेरे मित्र श्री नजीरुद्दीन अहमद ने उठाया था, कि किन्हीं राज्यों में ऊपरी सदन की सदस्यता तथा निचले सदन की सदस्यता के बीच कुछ मात्रा में असंतुलन है। उन्होंने उदाहरण भी दिया। यदि मैंने उन्हें सही सुना है मैं विश्वास करता हूँ कि उड़ीसा राज्य में निचले सदन के सदस्यों की संख्या संविधान के अनुच्छेद 149 में निर्धारित सिद्धांतों के अनुरूप 60 के लगभग होगी। परिणामस्वरूप, यदि ऊपरी

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, 30 जुलाई, 1949, पृ. 27

** ख्., सीएडी, खंड IX, 30 जुलाई, 1949, पृ.पृ. 35-37