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नगरपालिका का अधिकार क्षेत्र नियम में बताये गये उद्देश्य तक सीमित कर दिया गया है, इस क्षेत्र पर जिला सभा का अधिकार क्षेत्र जारी रहेगा। नियम का विचार अधिकार क्षेत्र के वाद-विवाद को दूर करना है। दूसरी ओर कुछ लोगों ने कहा कि माइलियम राज्य क्षेत्र संयुक्त खासी-जैन्तिया पहाडि़यां जिलों से पूर्णतः अलग कर दिया जाए और शिलांग क्षेत्र के पूर्णतः अलग कर दिया जाए।

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पंडित हृदयनाथ कुंजरू : जैसा कि अब है।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं नहीं जानता क्या यह ऐसा है। प्रश्न यह है

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कि जैसा कि उस ओर से किसी ने कहा- मैं सोचता हूँ मेरे मित्र श्री रोहिनी कुमार चौधरी- नगरपालिका का तीन-चौथाई मार्ग वास्तव में इस क्षेत्र से घिरा है, हाँ इसमें तनिक भी संदेह नहीं है कि जहाँ तक कि विवाह कानून, उत्तराधिकार कानून, और दूसरे रीति-रिवाजों का सम्बन्ध है, मनुष्य माइलियम राज्य के इस भाग में रहने वाले उन कानूनों में, उन्हीं रीति-रिवाजों में, उन्हीं विवाह कानूनों में और पूर्ण जिले के उत्सवों में भाग लेते हैं। परिणामस्वरूप जो होगा वह यह मानते हुए कि यह क्षेत्र पूर्णतः संयुक्त

खासी-जैन्तियां पहाड़ी वे लोग मौलिक रूप से विवाह कानून, उनके रीति-रिवाज इत्यादि के बारे में माइलियम राज्य के शेष भाग के उनके भाइयों के समान हैं, वह तुरन्त उत्तराधिकारी के सामान्य कानून, विवाह के सामान्य कानून, सभी सामान्य नियम जो संसद को बनाने चाहिए अथवा असम विधानमण्डल को बनाने चाहिए, अधीन बन जायेंगे। मैं नहीं समझता कि यह सही है कि लोगों का वह भाग जो कुछ मामलों में उसी स्वभाव के है इस भांति सेवित होंगे। जनता का एक भाग जहाँ तक जनजाति जीवन का सम्बन्ध है अपनी सरकार प्राप्त करेंगे और एक भाग सामान्य कानूनों के अधीन होगा जिसके अधीन आम लोग हैं। यह इस कारण है कि प्रारूपण समिति ने महसूस किया कि उपखण्ड (2) के उपबन्ध और नियम जो इनके साथ हैं इस समस्या के उचित हल थे जैसे नियम में परिभाषित नगरपालिका के उद्देश्य के लिए कि माइलियम राज्य का वह भाग जो नगरपालिका का भाग है, नगरपालिका के अधीन रहना चाहिए, जबकि उन उद्देश्यों के लिए जिला परिषद बनाई गई है कि वह भाग जिला सभा के अधीन रहेगा। यहाँ कोई विवाद नहीं है और वह मौलिक उद्देश्य के लिए लाभदायक सहायक होता है जैसे कि उसी स्वभाव के व्यक्ति उसी प्रकार के कानूनों के और उसी प्रकार के प्रशासनिक तरीके के अधीन होने चाहिए जो सभी को रखने चाहिए और रखते हैं।

अब कुछ संविवाद इस बारे में हो सकता है कि क्या परन्तुक इतना व्यापक है कि विषय इसमें आ सकेंगे जो आने चाहिए अथवा क्या वह इस बारे में बहुत तंग है। मैं कोई राय देने के लिए तैयार नहीं हूँ। दो मुख्य प्रतिनिधियों द्वारा इस विषय में प्रारूपण समिति का मार्गदर्शन किया गया है जिनको इस विषय में बहुत जानकारी