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पंडित हृदयनाथ कुंजरू - मैं यह प्रश्न करता हूँ क्योंकि मेरे आदरणीय मित्र ने असम के प्रधानमंत्री और आदरणीय निकोल्स रॉय के अधिकार का संदर्भ दिया है। इन दोनों ने समिति की रिपोर्ट पर हस्ताक्षर किये हैं जिसका संदर्भ मैंने दिया है और समिति कहती है कि शिलांग नगरपालिका की सीमाएं वही रहनी चाहिएं जो इस समय हैं और उस क्षेत्र के मनुष्यों के स्तर को बदलने का कोई सुझाव नहीं देती।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : वह उन्होंने कर लिया होगा लेकिन रिपोर्ट
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दुबारा परीक्षण के लिए विबंध की भांति कार्य नहीं कर सकती। मैं नहीं समझता कि हम मामले को और आगे ले जा सकते हैं। जैसा मैंने कहा कि प्रारूपण समिति ने महसूस किया था कि यह ऐसा स्थानीय विषय था कि बिना अधिकार के वे कार्य नहीं कर सकते थे अथवा इस मामले में भाग लेने वालों की सलाह के कार्य कर सकते थे। हमने उनकी सलाह मानी और कार्य किया। यदि वे सोचते हैं.......(रूकावट)
श्री कुलाधर चाल्हिया : दीमापुर में सम्पूर्ण भारत से लोग रहते हैं। दीमापुर के बारे में कुछ भी कहने का लाभ नहीं है। उसने दीमापुर के बारे में कुछ भी नहीं कहा है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : इसके बारे में अब तक मैंने कुछ भी नहीं
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कहा है; अब मैं इस पर आ रहा हूँ।
अब मैं स्वशासी जिलों से कुछ क्षेत्र अलग करने के विषय पर आ रहा हूँ।
इस संबंध में मैं सदन को नये अनुच्छेद 16-क की याद दिलाना चाहूँगा जिसे अभी हाल ही में पारित किया गया है। मैं उसे आपको बताना चाहूँगा। अनुच्छेद 16-क बनाने में दो प्रश्न उठाये गये थे। एक प्रश्न कुछ दो ..... के बारे में था जिन्हें गारों पहाडि़याँ कहा जाता है। उसके साथ मेरे मित्र चाल्हिया के द्वारा दीमापुर क्षेत्र का प्रश्न उठाया गया था। और मैं सोचता हूँ कि यह कहने में ठीक हूँ कि वह सभा में उपस्थित थे। उसमें असम के तीन प्रतिनिधि उपस्थिति थे जो इस सभा में भी उपस्थित थे। श्री वारदोलोई, आदरणीय निकोल्स रॉय और श्री चाल्हिया और यह विचार किया गया था क्या ये गारो पहाडि़यों के माउजाज और दीमापुर क्षेत्र स्वायत्तशासी जिले से अलग कर दिए जाएँ। यह कहा गया था कि सभा की स्वायत्तशासी जिले से अलग करना वांछनीय नहीं होगा क्योंकि इन माउजाज का जीवन उनकी आर्थिक जिन्दगी स्वायत्तशासी जिलों से निकटतम बंधी थी। इसलिए यह कहा गया था कि यह काफी होगा यदि यह क्षेत्र, जिन्हें कहना चाहिए गारो पहाडि़यों से तीन माउजाज और दीमापुर क्षेत्र के निवासी असम विधानसभा में राजनैतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए बिल्कुल अलग कर दिए गये थे। मेरे मित्र श्री चाल्हिया द्वारा यह निश्चय तौर पर कहा गया था जिन्होंने अब दीमापुर क्षेत्र का प्रश्न उठाया है। इसलिए यह उनके निवेदन पर और असम के इन तीन प्रतिनिधियों के