296 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कहने पर था कि पैरा 16-क उन शर्तों पर बनाया गया था जिन पर यह अब बनाया गया है। यदि उस समय यह सहमत हुए होते कि यहाँ पूर्ण अलगाव किया जाए कि उसे स्वशासी क्षेत्र का भाग नहीं बनाना चाहिए तो उनकी इच्छा पूरी करने में एतराज न होता। इसलिए प्रारूपण समिति को कुछ करने के लिए दोष देना ठीक नहीं है। जिसे करने के लिए सलाह नहीं दी गई थी। यह मेरा पहला निवेदन है। पैरा 16-क में प्रारूपण समिति तथा असम के तीन प्रतिनिधियों का ठोस निर्णय समाया हुआ है, श्री चाल्हिया सहित जिसने पहली बार दीमापुर का प्रश्न उठाया है।
श्री कुलाधर चाल्हिया : क्या मैं निवेदन कर सकता हूँ कि मुझे वहाँ एक सलाहकर की भांति और देखने के लिए बुलाया गया था मैंने कभी महसूस नहीं किया कि मैं प्रारूपण समिति का सदस्य था और आपको मेरा नाम भी वहाँ नहीं मिलेगा।
माननीय सभापति : यह सुझाव किसी ने नहीं दिया है कि आप वहाँ प्रारूपण समिति के सदस्य थे। उन्होंने यह कहा है कि आप वहाँ उपस्थित थे।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यह उनकी राय है। यहाँ कहने के लिए एक बात और भी है, जैसे संशोधन 99 के अधीन जो राज्यपाल को सीमाएं बदलने, क्षेत्र घटाने आदि की शक्ति देता है। राज्यपाल के लिए यह पूर्णतः संभव होगा कि वह, अब स्वायत्तशासी क्षेत्र में जोड़े जा रहे क्षेत्र से किसी क्षेत्र को पृथक करे, दूर करे। यदि यह स्पष्ट नहीं है, तो मसौदा समिति एक स्पष्ट वाक्य खण्ड जोड़ने के लिए तैयार होगी। लेकिन मैं यह कहना पसन्द नहीं करता कि यह अति दुर्भाग्यपूर्ण है। इसको संभवत् बीच में लटका दिया जाय कि प्रतिनिधि किसी सभा में आये, किसी इकरार नामे से सहमत है और इकरार नामे से मुकर जाए, संशोधन में लाये और मसौदा समिति के विरुद्ध टिप्पणी का मुद्दा बनाये और कहते हैं कि उन्होंने कुछ ऐसा किया जो या तो प्रतिनिधित्व के विरुद्ध है .......... * (रुकावट) श्री कुलाधर चाल्हिया : नहीं।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मुझे अति खेद है। सब मैं कर सकता...
(रुकावट) श्री कुलाधर चाल्हिया - नहीं, नहीं।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मुझे अति दुःख है इसलिए जहाँ तक पैरा 16-क का संबंध है, राजनैतिक आवश्यकताओं के लिए यह अलगाव की व्यवस्था करता है। यदि पूर्ण अलगाव आवश्यक है, मैं निवेदन करता हूँ कि यह पहले से
* ख्., बिंदु रूकावट बताते हैं।