पैरा 19 - Page 318

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ही हमारे द्वारा पारित प्रस्ताव में व्यवस्थित किया गया है। यदि यह वह नहीं करता, तो बिल्कुल स्पष्ट करने के लिए मैं एक वाक्य खण्ड बनाने के लिए तैयार हूँ कि राज्यपाल यदि उचित समझता है, उसे एक क्षेत्र अलग करने की शक्तियाँ होंगी। जहाँ तक मेरा संशोधन नये पैरा 19 में व्यवस्था करता है का संबंध है मैं विश्वास करता हूँ कि वाद-विवाद के सभी बिन्दुओं का उत्तर दिया जा चुका है।

अब, श्रीमन, मैं अपने मित्र श्री कुंजरू के संशोधन पर बात करने का प्रस्ताव करता हूँ जो एक दूसरा पैरा जोड़ने के बारे में है। ध्यान देने योग्य है कि उनका संशोधन कुछ भी नहीं है बल्कि पांचवीं अनुसूची की मात्र पुनरावृति है जिसे पहले ही पारित किया जा चुका है जो असम को छोड़कर जनजाति क्षेत्र अथवा अनुसूचित जाति क्षेत्र के बारे में है। इससे अधिक इनके संशोधन में कुछ भी नहीं है। उनके संशोधन के विरुद्ध मेरा यही निवेदन है। जहाँ तक इनके नये पैराग्राफ के उपवाक्य

खण्ड (1) का सम्बन्ध है यह बिल्कुल अनावश्यक है। यह छठी अनुसूची के पैरा 12(ख) के द्वारा शासित है जो राज्यपाल को लागू करने अथवा न लागू करने की शक्ति देता है अथवा यदि लागू की, रूपान्तर विधि से लागू की चाहे कानून संसद द्वारा बनाये थे अथवा असम के विधानमण्डल द्वारा। इसलिए वह उपबंध बिल्कुल अनावश्यक है और हमारे मसौदे में पहले से ही रखा गया है।

दूसरे खण्ड (2) के बारे में, स्थिति यह है। यह बिल्कुल सत्य है कि जहाँ तक पांचवीं अनुसूची का संबंध है, हम राज्यपाल को उस क्षेत्र के बारे में विनियम बनाने की शक्तियाँ देते हैं लेकिन छठी अनुसूची में इस प्रकार की शक्तियां देने का प्रस्ताव नहीं करते। यह इस कारण है कि पांचवीं अनुसूची के संबंध में जनजातियों को कोई अधिकार नहीं है कि वे अपने लिए नियम बनाएं लेकिन छठी अनुसूची में जिला परिषद तथा क्षेत्रीय सभाओं को कुछ खास विषयों पर नियम बनाने की शक्तियाँ प्रदान की हैं मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि जहाँ जनजातियों के विनियम बनाने की शक्तियाँ नहीं दी गई हैं वहाँ राज्यपाल के विनियम बनाने की शक्तियां देना आवश्यक है। लेकिन, जहाँ जनजाति परिषदों को नियम बनाने की शक्तियाँ दी गई हैं मुझे यह दिखाई देता है कि राज्पाल को वैसे ही विनियम बनाने की शक्तियां देना अनावश्यक है। यही कारण है कि जहाँ तक छठी अनुसूची का सम्बन्ध है हम राज्यपाल को शक्तियाँ देने का प्रस्ताव नहीं करते। इसलिए मैं निवेदन करता हूँ कि यह संशोधन बिल्कुल अनावश्यक है।

यहाँ एक दूसरा प्रश्न है जिसे मैं बिल्कुल स्पष्ट करना चाहूँगा। छठी अनुसूची के अधीन जिला परिषद को कानून की शक्तियाँ देने का प्रस्ताव करना बिल्कुल भी नई शक्ति नहीं है। सच्चाई यह है कि असम में कुछ ऐसे नियम मौजूद हैं जो